चैत्र नवरात्र के बीच आज 23 मार्च, सोमवार को लक्ष्मी पंचमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर आने वाला यह दिन मां महालक्ष्मी की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा के साथ लक्ष्मी पंचमी का शुभ संयोग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लक्ष्मी पंचमी को ‘श्री पंचमी’ और ‘कल्पदि पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है। खास तौर पर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में यह दिन अधिक प्रचलित है। जहां व्यापारी वर्ग धन-लक्ष्मी पूजा और बही-खातों की पूजा करता है।
पूजा का शुभ समय और विधि
शाम के समय सूर्यास्त के बाद 6:30 से 8:30 बजे के बीच पूजा का शुभ मुहूर्त माना गया है। मां लक्ष्मी को गंगाजल और दूध से अभिषेक कर कमल या लाल गुलाब अर्पित करें। गाय के घी का दीपक जलाकर आरती करें। सफेद मिठाइयों का भोग भी लगाए।

लक्ष्मी पंचमी के आसान उपाय
- श्री यंत्र की पूजा कर श्री सूक्त का पाठ करें।
- कमलगट्टे की माला अर्पित कर मंत्र जप करें।
- आर्थिक परेशानी में कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- दक्षिणावर्ती शंख के साथ लक्ष्मी पूजा करें।
- ओम महालक्ष्मी नमः जैसे मंत्रों का जप करें।
- पीली कौड़ी, हल्दी, श्रीफल और मखाने की खीर का भोग लगाए।
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