पटना। बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। शनिवार को राजद प्रत्याशी कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया बाढ़ कोर्ट पहुंचे और चुपचाप न्यायालय के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह वही नेता हैं, जो चुनाव में जनता से जुड़ने का दावा करते रहे, लेकिन पिछले दो वर्षों से हत्या के एक मामले में फरार जीवन जी रहे थे।
हाई कोर्ट से जमानत खारिज
लल्लू मुखिया ने आत्मसमर्पण का फैसला तब लिया, जब हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट में सरेंडर के महज छह घंटे बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में बाढ़ जेल भेज दिया गया। वकील संजय कुमार ने बताया कि केस नंबर 98/23 में वे हत्या के अभियुक्त हैं और अदालत की कार्रवाई के बाद अब आगे की सुनवाई जेल से ही होगी।
कुर्की के बावजूद फरार
दो साल पुराने इस मर्डर केस में पुलिस लगातार उनकी तलाश में थी। चुनाव से पहले पुलिस ने उनके घर की कुर्की भी की, लेकिन लल्लू मुखिया ने गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत रहना ही चुना। स्थानीय लोग बताते हैं कि चुनाव जीतने की उम्मीद और राजनीतिक सक्रियता के बावजूद वे अपने परिवार और कार्यकर्ताओं से दूरी बनाए हुए थे।
राजनीतिक आरोपों की गूंज
कभी बाहुबली नेता अनंत सिंह के बेहद करीबी रहे लल्लू मुखिया लंबे समय से मुंगेर सांसद ललन सिंह पर उन्हें साजिश के तहत फंसाने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि पुलिस और अदालत दोनों ने हमेशा जांच को तथ्यों पर आधारित बताया है। सुप्रीम कोर्ट से मिली कुछ महीनों की गिरफ्तारी रोक ने उन्हें अस्थायी राहत जरूर दी, लेकिन राहत अवधि खत्म होने के बाद अब उन्हें जेल का रास्ता पकड़ना पड़ा। लल्लू मुखिया का आत्मसमर्पण न सिर्फ उनके राजनीतिक भविष्य पर असर डाल सकता है, बल्कि स्थानीय राजनीति में नई हलचल भी पैदा कर रहा है।
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