सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा विवादः कमेटी की अंतिम बैठक आज, हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। सम्राट मिहिर भोज नाम पट्टिका विवाद मामले में आज अंतिम और बड़ी बैठक होने जा रही है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के निर्देश पर बनी कमेटी की अंतिम बैठक आज होगी। बैठक संभागीय कमिश्नर आशीष सक्सेना की अध्यक्षता में होगी। इस दौरान आईजी पुलिस, गुर्जर और क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधि, दो इतिहासकार और एसडीएम शामिल होंगे।

अभी तक दोनों ही समाज की ओर से 300 से अधिक दावे और प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। ऐसे में आज होने वाली बैठक के दौरान आपत्तियां भी दायर की जाएंगी जिस पर कमेटी अंतिम चर्चा के बाद हाई कोर्ट में रिपोर्ट सबमिट करेगी। मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में 20 अक्टूबर होगी।

क्षत्रिय समाज ने प्रतिहार राजवंश का एफिडेविट प्रस्तुत किया
मामले में क्षत्रिय समाज ने कहा कि देश में कन्नौज, मंडोर(जोधपुर), नागौद(सतना जिले) सहित अन्य क्षेत्रों से मामले से जुड़े हुए आवश्यक तथ्य और दस्तावेज सामने लाए हैं। जिनमें सबसे प्रमुख क्षत्रिय प्रतिहार राजवंश की अंतिम पीढ़ी के महाराज अरुणोदय कुमार सिंह का एफिडेविट भी प्रस्तुत किया जा रहा हैं। इसके अलावा कमेटी के सामने इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि गुर्जर समाज जम्मू कश्मीर में एसटी, राजस्थान में एसटी की मांग कर रहे हैं।वही मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में ओबीसी वर्ग में आते हैं।
जबकि क्षत्रिय समाज शुरू से लेकर अभी तक सामान्य श्रेणी में ही रहा है। लिहाजा कुछ लोगों के द्वारा इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया जा रहा है। इतिहास में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि गुजरात और राजस्थान क्षेत्र को मिलाकर गुर्जरात्रा क्षेत्र कहलाता था। जिस पर कन्नौज के बाद सम्राट मिहिर भोज ने शासन किया। इसलिए उन्हें गुर्जर नरेश की उपाधि भी दी गई थी। इसलिए गुर्जर एक उपाधि है। वह जाति सूचक शब्द नहीं है।

गुर्जर समाज ने ताम्रपत्र, मुद्राएं कमेटी के सामने रखी
वहीं गुर्जर समाज ने भी स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा यमुनानगर लश्कर उत्तराखंड और अक्षरधाम मैं स्थापित की गई गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की मूर्तियों से जुड़े हुए नोटिफिकेशन और ताम्रपत्र, मुद्राएं कमेटी के सामने रखी है। लिहाजा आज आयोजित होने जा रही कमेटी की अंतिम बैठक से इस विवाद से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने निकल कर आ सकता है, जिसे कमेटी हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगी।

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