हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए बजट पर सियासत गरमा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस बजट को प्रदेश के इतिहास का सबसे निराशाजनक, नीरस और दिशाहीन दस्तावेज करार दिया है. BJP ने इस बजट को ₹4000 करोड़ की कटौती, गारंटियों पर धोखा और विकास योजनाओं पर ब्रेक लगाने वाला बताया है. बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नीरस और 9,668 करोड़ के घाटे का बजट बताया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहली बार बजट तीन चरणों में पढ़ा गया.
हिमाचल बजट को जयराम ठाकुर ने निराशाजनक बताया. उन्होंने सुक्खू सरकार पर जनविरोधी होने का आरोप लगाया, पूर्व सरकार के संस्थानों को बंद करने और कर्मचारियों की सैलरी रोकने की आलोचना की.
जयराम ठाकुर ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने 29 साल के राजनीतिक जीवन में लगातार 29 बजट देखे हैं, लेकिन ऐसा खोखला बजट पहले कभी नहीं देखा. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आते ही इस सरकार ने पूर्व सरकार द्वारा जनसुविधा के लिए बनाए गए 2000 से ज्यादा संस्थान बंद कर दिए. जयराम ठाकुर ने कहा कि अब यह सरकार जनहित योजनाओं का बजट और कर्मचारियों की सैलरी छीन रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उन्होंने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर यह सरकार जनता को कुछ देने के बजाय उनसे सुविधाएं छीनने का काम कर रही है.
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए. ठाकुर ने कहा कि बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री का अहंकार सातवें आसमान पर था. उन्होंने बजट तैयार करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की मेहनत को दरकिनार कर सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश की.
सड़क निर्माण से लेकर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि तक, सब कुछ केंद्र सरकार के पैसे से हो रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री अपनी कोई नई योजना लाए बिना इसे अपनी उपलब्धि बता रहे हैं.
जयराम ठाकुर ने प्रदेश की चरमराती वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने सारा खजाना अपने ‘मित्रों’ की खातिरदारी में लुटा दिया. अब जब खजाना खाली हो गया है, तो वित्तीय स्थिति सुधारने के नाम पर छोटे कर्मचारियों तक की सैलरी विलंबित (Defer) करने का तानाशाही फैसला लिया गया है.
पूर्व सीएम ने कांग्रेस की चुनावी गारंटियों पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा हवा हो गया है, उलटा पानी और बिजली के भारी-भरकम बिलों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. दूध के दाम बढ़ाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर सरकारी खरीद न के बराबर है, जिससे पशुपालकों में भारी रोष है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, 4 घंटे 9 मिनट का लंबा और नीरस बजट पेश किया गया. बजट में कुछ नहीं था, इसलिए रणनीति के तहत इसे लंबा किया गया. आमतौर पर बजट हर साल आगे बढ़ता है, लेकिन इस बार बजट पीछे चला गया. बजट में एक शब्द पर आपत्ति जताने पर विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया, जबकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि सदन स्थगित नहीं होगा, इस पर विधानसभा अध्यक्ष बेबस नज़र आए.
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