पंजाब में राज्य की खनन नीति में हाल ही में किए गए सुधार अब परिणाम दिखाने लगे हैं. इन सुधारों से कानूनी खनन गतिविधियों को मजबूती मिली है, रेत और बजरी की आपूर्ति में सुधार हुआ है और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है.
मंत्री ने कहा कि “लैंडओनर माइनिंग साइट्स (एल.एम.एस.)” और “क्रशर माइनिंग साइट्स (सी.आर.एम.एस.)” की शुरुआत ने ज़मीन मालिकों और क्रशर संचालकों को सशक्त किया है. अब स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध होने से दूसरे राज्यों पर निर्भरता घट गई है और अवैध खनन पर अंकुश लगा है.
गोयल ने बताया कि नीति लागू होने के बाद सी.आर.एम.एस. के लिए 240 से अधिक और एल.एम.एस. के लिए 95 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें से 23 सी.आर.एम.एस. और 4 एल.एम.एस. को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है. शेष आवेदनों को जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों में शामिल कर आगे बढ़ाया जा रहा है. पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ पूरी होने के बाद ये साइटें दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच काम शुरू कर देंगी.
इन सुधारों से निर्माण और विकास परियोजनाओं के लिए कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी. स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की रॉयल्टी आय में भी इजाफा होगा.
पंजाब सरकार ने 11.58 करोड़ घन फुट कच्चे माल वाली 29 व्यावसायिक खनन साइटों के लिए नई ऑनलाइन नीलामी शुरू की है. इस प्रक्रिया ने नीलामी को पारदर्शी बनाया और सभी प्रतिभागियों को समान अवसर दिए. मूल्य-आधारित बोली, अग्रिम रॉयल्टी और विस्तारित लीज़ अवधि ने प्रक्रिया को और कुशल बनाया है.

पूर्व में बजरी का खनन केवल कुछ सीमित व्यावसायिक साइटों तक सीमित था. अब एल.एम.एस. और सी.आर.एम.एस. की शुरुआत से ज़मीन मालिक अपनी जमीन से बजरी निकाल सकते हैं या किसी अन्य को अधिकृत कर सकते हैं. इससे राज्य में रेत और बजरी की उपलब्धता बढ़ेगी, व्यापारिक अवसर बढ़ेंगे और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे.
बरिंदर कुमार गोयल ने दोहराया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की नेतृत्व वाली पंजाब सरकार निष्पक्ष और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. नीतिगत सुधार राज्य के खनन कार्यों को पारदर्शी, जवाबदेह और जन-हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.
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