शिवम मिश्रा, रायपुर। छत्तीसगढ़ में 2161 करोड़ के शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की टीम पूछताछ करेगी। बीते मंगलवार को EOW ने विशेष कोर्ट में लखमा के प्रोडक्शन वारंट की मांग करते हुए आवेदन दायर किया था, जिसे मंजूरी मिल गई। कोर्ट ने लखमा को 7 अप्रैल तक कस्टोडियल रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है।

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि शराब घोटाले में कवासी लखमा की ईडी गिरफ्तारी के बाद EOW की ईसीआईआर पर अपराध पंजीबद्ध किया गया था। EOW ने कवासी लखमा से पूछताछ के लिए रिमांड का आवेदन कोर्ट में लगाया था, जिसके बाद न्यायालय ने EOW के आवेदन को मंजूर करते हुए 7 अप्रैल तक की कस्टोडियल रिमांड सौंपी है।

बता दें कि कस्टोडियल रिमांड के दौरान लखमा से शराब घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर गहन पूछताछ होगी। सूत्रों के मुताबिक, उनसे मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्धों को भी जल्द तलब किया जा सकता है। EOW और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस घोटाले की परतें खोलने में जुटे हैं, जिससे कई और बड़े नाम सामने आने की संभावना है। मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इससे पहले कोर्ट ने EOW को 19 और 20 मार्च को पूछताछ करने के इजाजत दी थी, जिसके बाद आशंका जताई जा रही थी की ईओडब्ल्यू कई अन्य लोगों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है।

सचिन पायलट ने की लखमा से मुलाकात

गौरतलब है कि बुधवार यानी 19 मार्च को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर कवासी लखमा से मुलाकात की। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, विधायक देवेंद्र यादव समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

21 जनवरी से जेल में हैं कवासी लखमा

गौरतलब है कि शराब घोटाले मामले में ED ने 15 जनवरी को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। इससे पहले उनसे 2 बार ED दफ्तर बुलाकर पूछताछ की गई थी। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार करने से पहले ED ने उन्हें 7 दिन कस्टोडियल रिमांड में लेकर पूछताछ की थी। उसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक लखमा को 14 दिन के न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। पिछली सुनवाई के दौरान जेल में पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं होने के कारण लखमा की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने लखमा की 18 फरवरी तक रिमांड बढ़ा दी थी।

क्या है शराब घोटाला?

तत्कालीन भूपेश सरकार में पूर्व IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और CM सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आयकर विभाग ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई, 2022 को याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत, अवैध दलाली के बेहिसाब पैसे का खेल चल रहा है. इसमें रायपुर महापौर रहे एजाज ढेबर का भाई अनवर ढेबर अवैध वसूली करता है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में दायर याचिका के आधार पर ED ने 18 नवंबर, 2022 को PMLA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. आयकर विभाग से मिले दस्तावेजों के आधार पर ED ने जांच के बाद 2161 करोड़ के घोटाले की बात का कोर्ट में पेश चार्जशीट में जिक्र किया था.

ED ने अपनी चार्जशीट में बताया कि किस तरह एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के ज़रिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया. ED ने चार्जशीट में कहा कि 2017 में आबकारी नीति में संशोधन कर CSMCL के ज़रिए शराब बेचने का प्रावधान किया गया, लेकिन 2019 के बाद शराब घोटाले के किंगपिन अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का MD नियुक्त कराया. उसके बाद अधिकारियों, कारोबारियों और राजनैतिक रसूख वाले लोगों के सिंडिकेट के ज़रिए भ्रष्टाचार किया गया, जिससे 2161 करोड़ का घोटाला हुआ. इस मामले में ED ने 15 जनवरी को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था.

ED ने कोर्ट में 3,841 पन्नों की चार्जशीट की पेश

गौरतलब है कि 13 मार्च को शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पेशल कोर्ट में 3,841 पन्नों का चालान पेश किया है, जिसमें जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा समेत 21 अन्य को आरोपी बनाया गया है.

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