जुबैर अंसारी/ सुपौल। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और बिहार मद्यनिषेध कानून के तहत बिहार में शराबबंदी को कड़ाई से लागू करने की दिशा में सुपौल के उत्पाद न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने करीब आठ साल पुराने शराब तस्करी के एक मामले में आरोपी को दोषी पाते हुए कड़ी सजा मुकर्रर की है।

​न्यायालय का सख्त फैसला

​उत्पाद न्यायालय संख्या-1 के न्यायाधीश अभिषेक कुमार मिश्रा की अदालत ने पिपरा थाना कांड संख्या में सजा के बिंदु पर सुनवाई की। अदालत ने आरोपी सुनील कुमार (निवासी: तीनटोलिया, प्रतापगंज) को बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दोषी करार दिया। न्यायालय ने उसे 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में अभियुक्त को 6 माह की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी।

​क्या था पूरा मामला?

​यह मामला 1 नवंबर 2017 का है। पुलिस ने पिपरा थाना क्षेत्र के रामपुर (वार्ड संख्या 6) में तलाशी अभियान के दौरान एक इंडिका कार (BR-1A 3883) को रोका था। तलाशी लेने पर वाहन से 400 बोतल नेपाली ‘दिलवाले’ शराब बरामद हुई। पुलिस ने मौके से शराब के साथ सुनील कुमार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

​अभियोजन की दलीलें और सजा

​मामले की जांच के बाद 27 दिसंबर 2017 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक धर्मेंद्र कामत ने चार गवाहों को पेश कर अपराध सिद्ध किया। 7 जनवरी 2026 को अभियुक्त का बयान दर्ज करने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर अब अंतिम मुहर लग गई है।