सत्या राजपूत, रायपुर। सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर पिछले एक माह से तूता धरना स्थल पर आमरण अनशन कर रहे डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन उस समय और गंभीर हो गया, जब अनशन पर बैठे एक डीएड अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ गई और वह मूर्छित हो गया। हैरानी की बात यह रही कि एक घंटे तक इंतजार के बावजूद मौके पर एम्बुलेंस नहीं पहुंची। मजबूरी में साथी लोग रोते-रोते अभ्यर्थी को लेकर पैदल ही अभनपुर सरकारी अस्पताल के लिए निकले। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की खामोशी और शिक्षा विभाग की मनमानी ने प्रदेश के युवाओं को खतरे में डाल दिया है। अगर ऐसी स्थिति रही तो कभी भी किसी भी अभ्यर्थी की मौत हो सकती है तब कौन जिम्मेदार होगा?
यह पूरी घटना शासन-प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। आमरण अनशन पर बैठे शैलेंद्र कुमार साहू ने कहा कि तूता धरना स्थल पर पिछले एक माह से डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन जारी है, लेकिन शासन और शिक्षा विभाग इस ओर कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशानुसार बीएड के 2621 सहायक शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था और उनके स्थान पर डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी थी। विभाग ने केवल 1299 डीएड अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति देकर पल्ला झाड़ लिया, जबकि 1314 अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं।


अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि आखिर शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले में मौन क्यों हैं। क्या उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भय नहीं है? अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि मौजूदा हालात में किसी भी समय किसी अभ्यर्थी की जान जा सकती है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होगी।
ये है पूरा मामला
नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले एक महीने से अधिक समय से डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन जारी है। यह आंदोलन सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के शेष रिक्त पदों लगभग 1300-2300 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर चल रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार ने इन पदों पर नियुक्ति नहीं की, जबकि पहले बीएड धारकों को बर्खास्त कर डीएड वालों को अवसर दिया जाना था।
इतने दिनों से क्यों मौन हैं शिक्षा मंत्री?
आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया है कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और शिक्षा विभाग के अधिकारी इतने दिनों से क्यों मौन हैं?
क्या हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों (जैसे अप्रैल 2024, सितंबर 2025, अगस्त 2024) की अनदेखी हो रही है? अनशन के दौरान यदि किसी अभ्यर्थी की मौत हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा ? शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन या पूरी सरकार?
160 से अधिक अभ्यर्थियों की बिगड़ चुकी है तबीयत
यह भर्ती विवाद पुराना है। पिछले तीन सालों से हक की लड़ाई जारी है। कोर्ट ने प्राथमिक स्तर पर डीएड को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद बीएड शिक्षकों की बर्खास्तगी हुई, लेकिन शेष पदों पर नियुक्ति में देरी से डीएड अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। अनशन के कई दिनों में 160 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, कई अस्पताल में भर्ती हैं। हाल ही में अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव भी किया, जहां पेट्रोल लेकर आत्मदाह की कोशिश तक की। कांग्रेस नेता और अन्य भी समर्थन में पहुंचे।
शेष रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग
आमरण अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थियों की मांग है कि शेष रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति दो, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन जवाब दो। युवा अपनी जान जोखिम में डालकर हक मांग रहे हैं, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
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