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पानीपत : पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के कारण बंद बार्डरों का दुष्प्रभाव सरकार के साथ-साथ आमजन समेत हर वर्ग पर पड़ा है. अंबाला में शंभू बार्डर, जींद के नरवाना में दातासिंहवाला बार्डर, कैथल के गुहला क्षेत्र में टटियाना में बार्डर बंद हैं. इसी तरह दिल्ली का सिंघु, लामपुर, टीकरी और औचंदी बार्डर बंद होने से नौ दिनों में करीब 1700 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. करीब 1500 करोड़ का व्यापार प्रभावित हो गया है. इतना ही नहीं सात जिलों इंटरनेट बंद होने के कारण आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है. रजिस्ट्री ओर आनलाइन लेने-देन पर बुरा असर पड़ा है.
पंजाब के किसानों के 13 फरवरी को दिल्ली कूच की घोषणा के कारण प्रदेश सरकार ने 11 फरवरी से ही बार्डर सील कर दिए थे. रूट डायवर्ट होने के कारण चंडीगढ़ और दिल्ली जाने के लिए करीब 50 से 90 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ते तय करने पड़ रहे हैं. उद्योगों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है., तैयार माल भी फैक्ट्रियों में पड़ा है.
रोडवेज व निजी ट्रांसपोर्टर सबसे अधिक प्रभावित
बार्डर सील होने से राज्य परिवहन और निजी ट्रांसपोर्टरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल और पानीपत डिपो को करीब तीन करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. अब यात्री भी कम हो गए हैं. निजी ट्रांसपोर्टरों को अब माल ढुलाई के आर्डर नहीं मिल रहे हैं. करीब 2000 ट्रक खड़े हो गए हैं. इससे करीब 90 करोड़ का नुकसान हो चुका है.
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