उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन हुआ. जिसमें संसदीय और विधायी कार्यों को लेकर चर्चा चली. तीन दिन तक ये सम्मेलन चला. इस सम्मेलन के आयोजन को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सम्मेलन के दौरान विधानमंडलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिंता व्यक्त किए जाने को उचित बताया. साथ ही पक्ष और विपक्ष दोनों को इस पर अमल करने की बात भी कही.

मायावती ने कहा कि ‘देश में संसद और राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार और स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है. इसीलिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिंता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक और सराहनीय है. जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी जरूर करना चाहिए.’

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बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भारतीय संसद और राज्यों के विधानमण्डल यहां देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं. सरकार या कार्यपालिका को देश और जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम है. संसद और विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर और सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत जरूरी है.

मायावती ने मदरसों को लेकर कहा कि सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं है. सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण और सामयिक है. इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत है. वैसे भी संभवतः यहां कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की खबरें आती रहती हैं, जिस पर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख्ती से जरूर रोकना चाहिए’.