लुधियाना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों पंजाब प्रवास पर हैं। अपने तीन दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में आज वे लुधियाना के अरबिंदो कॉलेज में प्रबुद्धजनों (बुद्धिजीवियों) से संवाद करेंगे। इस विशेष कार्यक्रम में संघ प्रमुख देश और समाज की बेहतरी के लिए संघ द्वारा निर्धारित किए गए ‘पंच परिवर्तन’ के एजेंडे पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

बता दें कि इस कार्यक्रम में प्रवेश केवल उन्हीं लोगों को दिया गया है, जिन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। मोहन भागवत इस दौरान पंजाब और देश के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर भी अपना दृष्टिकोण रखेंगे।

क्या हैं संघ के पंच परिवर्तन?

संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में समाज को नई दिशा देने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है:

  1. सामाजिक समरसता:
    ‘हम सब एक रक्त’ के नारे के साथ समाज से जातिगत भेदभाव मिटाने पर जोर दिया जाएगा। महापुरुषों और गुरुओं के पर्व मिल-जुलकर मनाने और परिवार के साथ दिन में कम से कम एक बार भोजन करने का आह्वान किया गया है।
  2. पर्यावरण संरक्षण:
    पर्यावरण को लेकर संघ का स्पष्ट संकल्प है। इसके तहत थाली में जूठन न छोड़ना, बिजली की बचत (कमरे से निकलते समय लाइट-पंखे बंद करना), प्लास्टिक का त्याग और खेती में रसायनों की जगह गो-आधारित प्राकृतिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
  3. कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक ज्ञान):
    सप्ताह में एक दिन पूरा परिवार साथ बैठकर संवाद और सत्संग करे। पूजा के समय मोबाइल-टीवी बंद रखने और बच्चों की संगति पर ध्यान देते हुए उनके साथ मित्रवत व्यवहार करने पर जोर दिया गया है।
  4. आत्मनिर्भर जीवन और स्वदेशी:
    जन्मदिन और विवाह वर्षगांठ जैसे उत्सवों को भारतीय रीति-रिवाजों से मनाना, स्थानीय (Local) और स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना तथा हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा में करने का संकल्प। साथ ही अभिवादन के लिए ‘सत श्री अकाल’, ‘राम-राम’ या ‘नमस्ते’ का प्रयोग और नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाना।
  5. नागरिक कर्तव्य:
    देशहित में कार्य करना, ट्रैफिक नियमों का पालन करना और स्वच्छता बनाए रखना। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाना और राष्ट्रीय त्योहारों में सक्रिय रूप से भाग लेना इस स्तंभ का मुख्य हिस्सा है।