दिल्ली-NCR पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए की गई बड़ी ठगी का खुलासा किया है। आरोप है कि ठग लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगी कारें और भव्य सेमिनार का दिखावा कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। सेमिनारों में ब्रांडेड कपड़े, महंगी टी-शर्ट और बड़े मंच के जरिए यह जताने की कोशिश की जाती थी कि यह कोई विश्वसनीय और बड़ी कंपनी है। लोग जल्दी अमीर बनने के सपने दिखाकर ठगों का भरोसा हासिल किया जाता था।
पुलिस ने विनोद और विनय नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट बताकर लोगों को ठगते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट और भव्य सेमिनारों के जरिए करीब 1,500 लोगों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। वहीं, विनय इस पूरे ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगी कारें, होटल और भव्य सेमिनार की तस्वीरें साझा कर लोगों का भरोसा जीतते थे। वे दावा करते थे कि डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन ट्रेडिंग और फर्जी वेबसाइट के जरिए कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का तरीका जानते हैं। इसी भरोसे के दम पर हजारों लोगों को अपने जाल में फंसाया गया।
फर्जी वेबसाइट और सेमिनार बना हथियार
आरोपियों ने एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी, जिसे पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से डिजाइन किया गया था। वेबसाइट पर निवेश, ऑनलाइन कमाई और डिजिटल बिजनेस से जुड़े बड़े दावे किए जाते थे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में सेमिनार और मोटिवेशनल मीटिंग्स का आयोजन किया जाता था।
सेमिनारों में आरोपी महंगे कपड़े, ब्रांडेड टी-शर्ट और बड़े मंच के जरिए यह दिखाते थे कि यह एक बड़ी और भरोसेमंद कंपनी है। सेमिनार में आने वाले लोगों को पहले छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था। शुरुआत में कुछ लोगों को मुनाफा दिखाकर भरोसा जीत लिया जाता था। इसके बाद उन्हें बड़े पैकेज और ज्यादा निवेश के लिए उकसाया जाता था। जैसे ही लोग लाखों रुपये निवेश करते, उनकी वेबसाइट अकाउंट ब्लॉक कर दी जाती या फिर उनसे संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता था।
आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों के जरिए निवेश की रकम इकट्ठा की जाती थी। रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर कैश या अन्य तरीकों से निकाल लिया जाता था, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। इसी नेटवर्क के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी अंजाम दी गई।
उधार लेकर पैसा लगाया था
इस ठगी में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई लोग प्रभावित हुए हैं। कुछ पीड़ितों ने अपनी जमा पूंजी, लोन और रिश्तेदारों से उधार लेकर पैसा निवेश किया था। जब लंबे समय तक ना मुनाफा मिला और ना रकम वापस हुई, तो पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस और साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली किसी भी तेज कमाई की स्कीम पर अंधविश्वास न करें। किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वैधता, रजिस्ट्रेशन और आधिकारिक दस्तावेजों की पूरी जांच करें। अगर किसी को ठगी का शक हो, तो तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
जांच में सामने आया है कि विनोद इस पूरे ठगी नेटवर्क का मुख्य चेहरा था। वह खुद को सफल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, डिजिटल बिजनेस कोच और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में पेश करता था। दूसरे आरोपी विनय की भूमिका पर्दे के पीछे रहकर पूरे सिस्टम को चलाने की थी। वह टेक्निकल और फाइनेंशियल मैनेजमेंट संभाल रहा था। विनय लखनऊ का रहने वाला है और उसे ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रीन्स से गिरफ्तार किया गया। वहीं, विनोद बागपत का रहने वाला है और उसे ग्रेनो वेस्ट से गिरफ्तार किया गया।
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