Jyotiraditya Scindia’s mother passes away: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां का निधन हो गया. दिल्ली AIIMS में राजा माता माधवी राजे सिंधिया (Madhavi Raje Scindia passes away) में अंतिम सांस ली. कल ग्वालियर में उनका अंतिम संस्कार होगा. बुधवार सुबह 9.28 बजे माधवी राजे सिंधिया (Madhavi Raje Scindia passes away) का निधन हुआ. पिछले कुछ महीने से उनका इलाज चल रहा था. वह लंबे समय से लंग्स इन्फेक्शन से पीड़ित थीं और दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था और पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थीं. उनकी उम्र 70 साल थी. आइए आपको बताते हैं राजमाता माधवी राजे सिंधिया के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से….
माधवी सिंधिया भी एक शाही परिवार से आती हैं. उनके मायके का भी गौरवपूर्ण इतिहास रहा है. माधवी राजे सिंधिया के दादा जुद्ध शमशेर जंग बहादुर नेपाल के प्रधानमंत्री रहे हैं. किसी वक्त में वो राणा डायनेस्टी के मुखिया भी रहे थे. माधवी राजे सिंधिया को प्रिंसेज किरण राज्य लक्ष्मी देवी के नाम से भी जाना जाता है. माधवी सिंधिया नेपाल के प्रधानमंत्री एवं, कास्की और लमजुंग के महाराजा, और गोरखा के सरदार रामकृष्ण कुंवर के पैतृक वंशज जुद्ध शमशेर जंग बहादुर राणा की पोती हैं.
शादी से पहले तस्वीर देखना चाहते थे माधवराव
राजमाता माधवी राजे सिंधिया की शादी सिंधिया परिवार के राजकुमार माधवराव सिंधिया की साथ हुई थी. माधवराव सिंधिया ताकतवर नेताओं में से एक थे. माधवी और माधवराव सिंधिया की शादी की कहानी बेहद दिलचस्प है. दरअसल, माधवराव सिंधिया की शादी का प्रस्ताव नेपाल राजघराने से आया. नेपाल के राजघराने से माधवी राजे की तस्वीर भी आई. जिसके बाद परिवार ने नेपाल की राजकुमारी की तस्वीर देखी और फिर माधवराव को तस्वीर दिखाने का फैसला किया. तस्वीर देखते ही पहली नजर में पंसद आ गईं. माधवराव ने परिवार से कहा कि वह शादी से पहले मिलना चाहते हैं, लेकिन यह हसरत पूरी नहीं हो पाई और दोनों की शादी तय हो गई.
ट्रेन से गई थी बारात
दोनों का विवाह धूमधाम से दिल्ली में संपन्न हुआ. ऐसे में बारात ले जाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए. ग्वालियर से दिल्ली के बीच विशेष ट्रेन चलाई गई. जिससे ग्वालियर के महाराज माधवराव सिंधिया अपनी बारात लेकर गए थे. 8 मई 1966 को परंपरागत रूप से शादी संपन्न हुई थी. शादी में कई विदेशी मेहमान भी सरीक हुए थे. किरण राज लक्ष्मी विवाह बाद सिंधिया घराने की बहू और सिंधिया राजवंश की रानी बनकर ग्वालियर आ गईं. शादी के बाद माधवी राजे ग्वालियर के जय विलास पैलेस में ही रहने लगी थीं. माधवी राजे के दो बच्चे हैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया और चित्रगंदा सिंह.
माधवराव सिंधिया से विवाह के बाद बदला नाम
ग्वालियर के महाराजा यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्वर्गीय पिता माधवराव सिंधिया ने 1966 में माधवी सिंधिया से शादी की थी. 1966 में माधवराज सिंधिया से विवाह के बाद उनका नाम बदलकर माधवी राजे सिंधिया रख दिया गया था. 30 सितंबर 2001 को माधव राज सिंधिया की मृत्यु के बाद उनको राजमाता सिंधिया के नाम से जाना जाने लगा.
विमान क्रैश में हुई थी माधवराव सिंधिया की मौत
माधव राज सिंधिया देश के चर्चित राजनेता थे. वे केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे. माधव राज ने 1971 में 26 साल की उम्र में गुना से पहला लोकसभा चुनाव जीता था. माधव राज सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 में दिल्ली से कानपुर जाते वक्त विमान क्रैश में हो गया था.
बेटे और बहू के साथ ही रहती थीं माधवी
माधवराव सिंधिया के निधन के बाद से माधवी बेटे और बहू के साथ ही रहती थीं. वहीं, पिता के निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार के राजनीतिक विरासत को संभाल लिया. माधवी राजे चैरिटी के काम में काफी सक्रिय रहती थीं. माधवी राजे 24 धर्मार्थ ट्रस्टों की अध्यक्ष थीं जो शिक्षा और चिकित्सा देखभाल जैसे क्षेत्रों में सहायता देते हैं. उन्होंने अपने दिवंगत पति माधवराव सिंधिया की याद में महल संग्रहालय में गैलरी भी बनाई.
सिंधिया परिवार का बनी रहीं संबल
माधवी राजे सिंधिया हैं. जो कभी मीडिया या राजनीति में नहीं आई, लेकिन उनकी हस्ती भी कम नहीं है. माधवी राजे माधवराव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक परिवार का संबल बनी रहीं. कई बार वह प्रचार के लिए जनता के बीच में दिखाई दी थीं.
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