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Maha Shivaratri: शुक्रेश्वर मंदिर गुवाहाटी में शुक्रेश्वर पहाड़ी या इटाखुली पहाड़ी पर स्थित है. यह मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है और इसके किनारे बहने वाली विशाल नदी का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है. अपनी लोकप्रियता के बावजूद, मंदिर में शांत और शांतिपूर्ण वातावरण बना रहता है, जो ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए उपयुक्त है. यह मंदिर 18वीं शताब्दी का है.
शुक्रेश्वर मंदिर का इतिहास संत शुक्र से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने शुक्रेश्वर पहाड़ी पर एक आश्रम बनाया था. संत उस स्थान पर ध्यान करते थे और नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करते थे. कालिका पुराण के अनुसार, जिस पहाड़ी पर संत ने प्रार्थना की थी उसका नाम हस्तगिरि इसलिए पड़ा क्योंकि उसका आकार हाथी के कूबड़ जैसा था. शुक्रेश्वर मंदिर का निर्माण अहोम राजा प्रमत सिंह ने 1744 में करवाया था.
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वास्तुकला और डिजाइन
शुक्रेश्वर मंदिर पारंपरिक असमिया और उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली का मिश्रण दर्शाता है. मुख्य संरचना में मधुमक्खी के छत्ते के आकार का गुंबद है, जो अहोम वास्तुकला की विशिष्टता है, तथा जटिल नक्काशी और मूर्तियों से सुसज्जित है. मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है. मुख्य मंदिर की ओर मुख करके खड़ी नंदी की मूर्ति. कई छोटे मंदिर. परिसर के अंदर एक पवित्र झील भी है.
यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय (Maha Shivaratri)
शुक्रेश्वर मंदिर पूरे वर्ष खुला रहता है, हालांकि यात्रा का सबसे अच्छा समय आपकी पसंद और यात्रा के उद्देश्य पर निर्भर करता है:
शीतकाल (अक्टूबर से फरवरी): यह यात्रा के लिए सबसे आरामदायक समय है क्योंकि मौसम सुहावना होता है और आर्द्रता कम होती है. साफ आसमान में ब्रह्मपुत्र नदी का अद्भुत दृश्य देखा जा सकता है.
महाशिवरात्रि (फरवरी/मार्च): यदि आप मंदिर के सबसे जीवंत वातावरण का अनुभव करना चाहते हैं, तो इस उत्सव के दौरान अपनी यात्रा की योजना बनाएं. हालाँकि, बड़ी भीड़ के लिए तैयार रहें.
मानसून (जून से सितम्बर): इस समय मंदिर के आसपास हरियाली अपने चरम पर होती है. वर्षा से धुले परिदृश्य शांत वातावरण प्रदान करते हैं, लेकिन कभी-कभी होने वाली भारी बारिश से सावधान रहें.
ग्रीष्मकाल (मार्च से मई): यद्यपि तापमान अधिक हो सकता है, फिर भी सुबह और शाम का समय मंदिर में दर्शन के लिए सुखद होता है.
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