मुंबई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज साय सरकार धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है, उसके ठीक एक दिन पहले सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा ने ‘धर्म की स्वतंत्रता बिल 2026’ को पास कर दिया. इस कानून का मकसद धोखाधड़ी, ज़बरदस्ती, लालच या शादी से जुड़े धोखे के ज़रिए किए जाने वाले धर्म परिवर्तनों पर रोक लगाना है.
इस बिल पर बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जिनके पास गृह मंत्रालय का भी प्रभार है, ने कहा कि यह कानून किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मकसद सिर्फ गैर-कानूनी धर्म परिवर्तनों को रोकना है. उन्होंने कहा कि यह बिल किसी भी व्यक्ति के भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अपने धर्म का पालन करने के संवैधानिक अधिकार पर कोई रोक नहीं लगाता, लेकिन इसमें ज़बरदस्ती या धोखे से दूसरों का धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार शामिल नहीं है.
सरकार के अनुसार, यह कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है और इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से और पूरी पारदर्शिता के साथ हों. प्रभावित व्यक्ति या उसके करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, और अधिकारी या पुलिस गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के संदेह होने पर कार्रवाई कर सकते हैं.
बिल में कहा गया है कि गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन में ज़ोर-ज़बरदस्ती, धमकी, धोखाधड़ी, छल, प्रलोभन या लालच के ज़रिए किए गए धर्म परिवर्तन, और किसी का धर्म परिवर्तन कराने के इरादे से की गई शादी शामिल है. स्वेच्छा से किए गए धर्म परिवर्तन की अनुमति है, लेकिन ज़बरदस्ती या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तनों को आपराधिक अपराध माना जाएगा.
10 साल तक की जेल की सज़ा
गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के सामान्य अपराध के लिए, तीन से पाँच साल तक की जेल और 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यदि पीड़ित कोई महिला, नाबालिग या SC/ST समुदाय का व्यक्ति है, तो सज़ा सात साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक के जुर्माने तक बढ़ सकती है.
बड़े पैमाने पर (सामूहिक) धर्म परिवर्तन, जिसमें कई लोग शामिल हों, के मामले में 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
यह बिल सबूत देने की ज़िम्मेदारी भी आरोपी पर डालता है; आरोपी को यह साबित करना होगा कि धर्म परिवर्तन ज़बरदस्ती या धोखाधड़ी से नहीं किया गया था.
पहले से अनुमति लेने के नियम के तहत, जो कोई भी अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे पहले से ही ज़िला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा. धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक पुजारी या संगठन को भी 30 दिन पहले सूचना देनी होगी, और धर्म परिवर्तन के बाद फिर से एक घोषणा पत्र जमा करना होगा.
इस बिल में शादी से जुड़ा एक प्रावधान भी शामिल है, जिसमें कहा गया है कि सिर्फ किसी का धर्म परिवर्तन कराने के मकसद से की गई शादी अमान्य मानी जाएगी. अगर पहचान या इरादा छिपाकर धर्म-परिवर्तन किया जाता है, तो यह दंडनीय होगा.
शिव सेना (UBT) का समर्थन
विपक्ष की ओर से, इस बिल को शिव सेना (UBT) का समर्थन मिला है, जबकि इंडियन नेशनल कांग्रेस, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध किया.
शिव सेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, “मैंने धर्म-परिवर्तन को लेकर सामने आए बिल को देखा. अगर कोई धमकी देकर ज़बरदस्ती धर्म-परिवर्तन करवाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. हम इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन अगर कोई CBI और ED की धमकी देता है, तो उसके लिए भी एक कानून पास किया जाना चाहिए.”
यह बिल अब महाराष्ट्र विधान परिषद में पेश किया जाएगा, जहां से पारित होने के बाद यह कानून अस्तित्व में आ जाएगा.
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