Mumbai Terror Propaganda: हरियाणा के हरीदाबाद और दिल्ली से व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इंजीनियरिंग टेरर मॉट्यूल का भंडाफोड़ हुआ है। महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट को पकड़ा है, जो एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों का प्रोपेगेंडा फैला रहा था। जांच में स्लीपर सेल नेटवर्क (Sleeper Cell Network), ऑनलाइन रिक्रूटमेंट सेल और विदेशी हैंडलर्स से संपर्क जैसे कई गंभीर पहलू सामने आए हैं।

एटीएस के मुताबिक, आरोपी की पहचान अयान शेख के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से लैपटॉप और मोबाइल फोन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी लंबे समय से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम चैनलों पर सक्रिय था, जहां कट्टरपंथी और आतंकी संगठनों से जुड़ा कंटेंट शेयर किया जाता था। एटीएस को खुफिया इनपुट मिला था कि कुछ ऑनलाइन ग्रुप्स के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर अट्रैक्ट करने की कोशिश की जा रही है। इन ग्रुप्स में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़ा कंटेंट शेयर किया जा रहा था। इसी सूचना के आधार पर एटीएस ने शहर के कुर्ला, गोवंडी और शिवाजी नगर इलाकों में छापेमारी की।

आरोपी के डिवाइस में आतंकी विचारधारा से जुड़े कई ऑडियो और वीडियो क्लिप बरामद

शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स के जरिए आतंकी विचारधारा से जुड़ा कंटेंट शेयर करता था। उसके डिवाइस से कई ऑडियो और वीडियो क्लिप भी बरामद हुई हैं, जिनमें मसूद अजहर के भाषण और चरमपंथी प्रचार सामग्री शामिल बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन ऑनलाइन ग्रुप्स में देश के अलग-अलग राज्यों के कई युवक भी जुड़े हुए थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री, भर्ती के तरीके और नए लोगों को जोड़ने से जुड़ी बातचीत भी होती थी।

आरोपी ने अपने दो करीबी दोस्तों को ग्रुप में जोड़ा

एटीएस को यह भी पता चला है कि आरोपी ने अपने दो करीबी दोस्तों को भी ऐसे टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़ा था, जहां आतंकी संगठनों का प्रोपेगेंडा फैलाया जाता था। हालांकि जांच में अब तक यह सामने आया है कि वे दोनों किसी आतंकी गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थे। पूछताछ के दौरान आरोपी के कुछ विदेशी संपर्कों की भी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों को शक है कि इन एन्क्रिप्टेड नेटवर्क्स में कुछ विदेशी हैंडलर्स और संदिग्ध सहयोगी भी सक्रिय थे, जो संभावित स्लीपर सेल और भर्ती नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

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