Mahavir Jayanti 2026 : जैन धर्म का प्रमुख पर्व महावीर जयंती की जैन मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ के लिए विशेष तैयारी की जा रही है. जैन समाज में इसे खास महत्व दिया जाता है. भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. उनका जन्म करीब 599 ईसा पूर्व बिहार के वैशाली स्थित कुंडलपुर में हुआ था. कहा जाता है कि वे शुरू से ही शांत स्वभाव के थे, उन्हें सांसारिक जीवन से ज्यादा धर्म और साधना में रुचि थी. इस साल 31 मार्च को भगवान महावीर के जन्मोत्सव मनाया जायेगा.

जैन धर्म में तीर्थंकर ऐसे महान व्यक्ति माने जाते हैं, जो सही ज्ञान और आचरण के जरिए लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं. वे जीवन से जुड़े सच्चे मूल्यों को समझाते हैं और मोक्ष का मार्ग बताते हैं. महावीर जयंती पर कई जगहों पर रथयात्रा भी निकाली जाती है. इस दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं.
महावीर जयंती के प्रमुख आयोजन
मंदिरों में भगवान महावीर का जल, दूध, केसर व चंदन से अभिषेक किया जाता है. विशेष पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम इस दौरान होते हैं. शहरों में भव्य रथयात्रा और झांकियां निकाली जाती है. व्रत और आध्यात्मिक कार्यक्रम दिन भर चलते हैं. श्रद्धालु उपवास रखकर ध्यान और साधना करते हैं. जैन ग्रंथों का पाठ और संतों के प्रवचन आयोजित होते हैं. इस दौरान जैन समाज के लोग जीवन में संयम, अहिंसा और सत्य के पालन का संकल्प लेते हैं.
महावीर स्वामी के प्रमुख सिद्धांत
- अहिंसा का पालन
- सत्य बोलना
- अपरिग्रह (अधिक संचय न करना)
- ब्रह्मचर्य और संयम
- आत्मशुद्धि और मोक्ष की साधना
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