तनवीर खान, मैहर। हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 से ज्यादा लोगों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इतने बड़े भयावह परिणामों के बाद भी न तो प्रशासन सतर्क हुआ है और न ही जिम्मेदार एजेंसियों ने कोई ठोस कदम उठाया है। हालात यह हैं कि शहर ही नहीं, अब गांवों में भी लोग मजबूरी में गंदा पानी उपयोग कर रहे हैं। मैहर जिले के रामनगर के टेगना ररिया टोला इसका ताजा और चिंताजनक उदाहरण है, जहां बस्ती के लोग एक गड्ढे में भरे दूषित पानी पर निर्भर हैं।
नल कनेक्शन है लेकिन नियमित आपूर्ति नहीं
गांव में जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन तो लगाए गए हैं, लेकिन पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही। इसके अलावा गांव में एक हैंडपंप भी मौजूद है, जो लंबे समय से बंद पड़ा है। परिणामस्वरूप करीब दो दर्जन परिवारों को नाली और गड्ढे में जमा गंदे पानी का उपयोग पीने और दैनिक जरूरतों के लिए करना पड़ रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।

क्या बड़े हादसे का इंतजार ?
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अफसरों के संज्ञान में मामला होने के बाद भी समाधान नहीं किया गया। जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासन यहां भी किसी बड़े हादसे या मौतों का इंतजार कर रहा है ? इस मामले की जानकारी मिलते ही एलएंडटी कंपनी के ऑपरेटर नरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और कैमरा देखते ही चलते बने जाते जाते कहते हुए सफाई दी।

ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल रहा साफ पानी ?
उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले पांच दिनों से गांव के लोग नाली का गंदा पानी पीने को मजबूर थे। उनका कहना था कि तकनीकी कारणों से पानी की आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसे अब दुरुस्त किया जा रहा है। हालांकि, सवाल यह है कि जब जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना लागू है, तो फिर ग्रामीणों को साफ पानी के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है। यह मामला सिर्फ टेगना ररिया टोला तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई गांवों की हकीकत बयां करता है। अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो गंदा पानी किसी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।

स्कूली छात्रा-बुजुर्ग महिला ने बताई पीड़ा, जिला पंचायत CEO ने कही ये बात
गांव की बुजुर्ग महिला सावित्री साकेत में बताया कि यहां पर नल में पानी नहीं आ रहा है। हैंडपंप भी बंद है, जिसकी वजह से गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है, उसके बाद भी हमें गंदा पानी ही पीना पढ़ रहा है। स्कूली छात्र आंचल साकेत ने बताया कि जीवित रहने के लिए पानी पीना जरूरी है, चाहे वह गंदा ही क्यों ना हो। गांव में लोगों के व्यक्तिगत बोर है, जिससे वह अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। इसलिए हमें पानी उनके यहां से नहीं मिल रहा है। जिंदा रहने के लिए गंदा पानी पीने को ही मजबूर है। मामले में जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जानकारी मिली है, अधिकारियों को भेजकर जांच करवाएंगे और जो भी व्यक्ति दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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