दिल्ली में देर रात सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया। इसके तहत 20 से अधिक IAS और DANICS अधिकारियों के ट्रांसफर और नई पोस्टिंग की सूची जारी की गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और सरकारी कामकाज में तेजी लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।  सरकार ने इस बदलाव के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक प्रक्रिया में सुधार प्राथमिकता है। अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के साथ समय पर निर्णय लेने और योजनाओं को लागू करने का दायित्व सौंपा गया है।

प्रशासनिक फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर हो रही है। 1989 बैच के IAS नरेंद्र कुमार को दिल्ली का नया फाइनेंशियल कमिश्नर बनाया गया है।  IAS प्रशांत गोयल को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी का पद सौंपा गया है। इसके अलावा उनके पास पावर और प्रशासनिक सुधार जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण विभाग भी रहेंगे।  IAS सौम्या सौरभ को डीएम के साथ स्पेशल सेक्रेटरी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।  सोनिका सिंह को डीडीए में स्पेशल सेक्रेटरी के रूप में तैनात किया गया है।

दिल्ली सरकार के हालिया प्रशासनिक फेरबदल का एक बड़ा हिस्सा DANICS अधिकारियों से जुड़ा है। इन्हें शिक्षा, जेल, ट्रांसपोर्ट, रेवेन्यू और इलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। कई अधिकारियों को डिप्टी सेक्रेटरी और असिस्टेंट कमिश्नर के पदों पर तैनात किया गया है। इस फेरबदल की खास बात यह है कि मंत्रियों के दफ्तरों में भी नए चेहरों की एंट्री हुई है। इसके अलावा, कुछ अधिकारियों को विशेष रूप से जनगणना 2027 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए तैनात किया गया है, ताकि राजधानी में संसदीय और प्रशासनिक कार्यकुशलता सुनिश्चित की जा सके।

हालिया प्रशासनिक फेरबदल में कुछ पुराने आदेशों में भी संशोधन किया है। खासकर DANICS अधिकारी अमित कुमार से जुड़ा पुराना ट्रांसफर ऑर्डर रद्द कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि इस पूरे बदलाव को केवल रूटीन ट्रांसफर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक रणनीतिक कदम है, जिससे विभिन्न विभागों में काम की गति और जवाबदेही बढ़ सके।

सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि आने वाले समय में जनगणना 2027 और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। इस फेरबदल से प्रशासन को ‘री-सेट’ करने और कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर, दिल्ली में हालिया प्रशासनिक फेरबदल सिर्फ पदों की अदला-बदली नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी प्रशासनिक सोच और रणनीति काम कर रही है।

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