लाल किला के बाहर हुए धमाके को लेकर जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए भारत में जासूसी कर रहे आरोपी सुहेल को इस धमाके की पहले से जानकारी थी। जांच एजेंसियों की पूछताछ में सामने आया है कि धमाके के बाद सुहेल मौके पर भी पहुंचा था। वहां उसने फोटो और वीडियो बनाए और उन्हें पाकिस्तान भेजा। अब तक जांच में यह सामने आ रहा था कि आरोपी केवल सूचनाएं इकट्ठा करने का काम कर रहे थे, लेकिन इस नए खुलासे के बाद मामला और गंभीर हो गया है। जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या आरोपी का इस धमाके में सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध था।

लाल किला के पास 10 नवंबर 2025 को हुए बम धमाके की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। गाजियाबाद के कौशांबी से पकड़े गए जासूसी के 6 संदिग्धों में शामिल सुहेल की भूमिका अब जांच एजेंसियों के फोकस में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, सुहेल को धमाके की पहले से जानकारी थी। पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि उसे “कुछ बड़ा होने” की सूचना थी। इतना ही नहीं, धमाके के बाद वह मौके पर भी गया था और वहां से फोटो और वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजे थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि सुहेल की लोकेशन धमाके से पहले भी लाल किले के आसपास मिली थी। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पुष्टि करने की कोशिश कर रही है कि वह घटना से पहले किस गतिविधि में शामिल था। इस मामले में आरोपियों के आईएसआई से जुड़े होने की आशंका के चलते जांच को और गहन किया गया है। अब तक यह माना जा रहा था कि आरोपी केवल सूचनाएं इकट्ठा करने का काम कर रहे थे, लेकिन इस नए इनपुट के बाद उनकी भूमिका कहीं अधिक गंभीर मानी जा रही है। वहीं, एक अन्य आरोपी इरम के मोबाइल फोन से एक और व्हाट्सऐप ग्रुप की जानकारी मिली है। जांच में सामने आया है कि वह एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थी। इससे यह संकेत मिल रहा है कि पूरा नेटवर्क बहु-स्तरीय और संगठित हो सकता है।

मेड इन इंडिया कैमरों से की जा रही थी निगरानी

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर लगाया गया कैमरा भी दिल्ली से खरीदा गया ‘मेड इन इंडिया’ कैमरा था। इसके अलावा, सोनीपत से बरामद दूसरा कैमरा भी भारत में बना हुआ बताया जा रहा है। यह बात सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गई है कि देश में बने उपकरणों का इस्तेमाल देश के खिलाफ गतिविधियों में किया जा रहा था। पुलिस ने कैमरा खरीदने वाले स्थान पर पहुंचकर भी पूछताछ और जांच की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्हें किसने खरीदा, किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया और इसके पीछे कौन लोग जुड़े हैं।

लालच देकर नाबालिगों को भी बनाया मोहरा

इस मामले में सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ है कि नाबालिगों को भी जासूसी के लिए इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के मुताबिक, गाजियाबाद के भोवापुर इलाके में रहने वाले 16-17 साल के कई किशोरों को पैसों का लालच देकर इस नेटवर्क में शामिल किया गया। ये किशोर पढ़ाई छोड़कर छोटे-मोटे काम करते थे, जिसका फायदा उठाकर सुहेल और उसके साथियों ने उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में धकेल दिया। अब तक 6 से 7 नाबालिगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन किशोरों से किस तरह के काम कराए गए और नेटवर्क में उनकी क्या भूमिका थी।

50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ, गिरफ्तारी का दायरा बढ़ा

पुलिस अब तक करीब 50 लोगों से पूछताछ कर चुकी है, जबकि 15 संदिग्ध फिलहाल हिरासत में हैं। इनमें एक कोरियर ब्वॉय और मुंबई से पकड़ा गया एक युवक भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले 1-2 दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस साजिश में शामिल 6 से 7 और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है।

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