पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना सोमवार को चौथे दिन भी जारी है। आज धरना स्थल पर ममता ने रवींद्र संगीत दल के साथ गाना गाया। ममता ने आरोप लगाया कि उनके धरना स्थल पर भाजपा और उसकी एजेंसियों पर्चे बांट रहे हैं। ममता ने TMC कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पर्चे बांट रहे लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दें। पर्चों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 मार्च को कोलकाता में होने वाली रैली का प्रचार किया जा रहा है।
ममता ने अपने समर्थकों से कहा, किसी अन्य राजनीतिक दल के कार्यक्रमों में ऐसे पर्चे बांटने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। उन्हें पकड़ो और पुलिस के हवाले कर दो। बनर्जी ने राज्य मंत्री शशि पांजा को भी इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पर्चे बांटने में शामिल लोग पूछताछ के बाद भाग गए।
ममता ने राज्य में स्पेशल इंटेसिव रिविजिन (SIR) में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विरोध में 6 मार्च दोपहर 2 बजे से कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरना शुरू किया है। ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया, “उनके पास जनता का समर्थन नहीं है। वे वोट चोर हैं। वे एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं।”
मुख्य चुनाव आयुक्त को TMC ने काले झंडे दिखाए
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्म होता दिख रहा है। इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कोलकाता पहुंचते ही विरोध का सामना करना पड़ा। रविवार रात विमान से कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उनका न्यूटाउन के एक होटल में ठहरने का कार्यक्रम था। लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही होटल के बाहर राजरहाट-न्यूटाउन इलाके के कई लोग इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में काले झंडे और बैनर थे और वे “गो बैक” के नारे लगा रहे थे।
विरोध करने वालों में अधिकतर लोग सत्ताधारी दल TMC के कार्यकर्ता और समर्थक बताए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान कई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसी के विरोध में लोग सड़क पर उतरे हैं। मौके पर पहुंचे राजरहाट-न्यूटाउन विधायक तपस चटर्जी ने कहा- इस इलाके के कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयुक्त यहां ठहरने आ रहे हैं, इसलिए आम लोग अपनी नाराज़गी जताने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हम एक भी मतदाता का नाम सूची से हटने नहीं देंगे।
SIR की फाइनल वोटर लिस्ट में क्या-क्या है
28 फरवरी को जारी ऑफिशियल डेटा के मुताबिक पिछले साल नवंबर में SIR प्रोसेस शुरू होने के बाद से अब तक 63.66 लाख नाम, यानी वोटर्स का करीब 8.3 परसेंट, हटा दिए गए हैं, जिससे वोटर्स की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ी ज़्यादा रह गई है।
इसके अलावा, 60.06 लाख से ज़्यादा वोटर्स को अंडर एडजुडिकेशन कैटेगरी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में उनकी एलिजिबिलिटी कानूनी जांच के जरिए तय की जाएगी, यह एक ऐसा प्रोसेस है जो चुनाव क्षेत्र के चुनावी समीकरणों को और बदल सकता है।
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