हेमंत शर्मा, इंदौर। वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर हुए ध्वस्तीकरण ने देशभर में आस्था से जुड़े लोगों को गहरी पीड़ा दी है। खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट ने इसे सनातन परंपरा और ऐतिहासिक विरासत पर सीधा हमला बताया है। ट्रस्ट अध्यक्ष यशवंत राव होलकर खुद मणिकर्णिका घाट पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
बिना किसी सूचना के कुछ ही घंटों में तोड़ दिया
यशवंत राव होलकर ने कहा कि जिस मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार वर्ष 1791 में पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था, उसे बिना किसी सूचना और संवाद के कुछ ही घंटों में तोड़ दिया गया। इस कार्रवाई में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्राचीन प्रतिमाएं मलबे में दब गईं। ट्रस्ट का कहना है कि चार में से दो मूर्तियां अभी सुरक्षित हैं, जिन्हें तत्काल ट्रस्ट को सौंपा जाना चाहिए, ताकि उनकी विधिवत देखरेख हो सके और श्रद्धालुओं को फिर से मां के दर्शन मिल सकें।
सनातन धर्म के लिए आस्था का जीवंत केंद्र
इस मामले में इंदौर के नागरिकों ने भी गहरा रोष जताया है। इंदौरवासियों का कहना है कि मणिकर्णिका घाट केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सनातन धर्म के लिए आस्था का जीवंत केंद्र है। उनका कहना है कि अहिल्याबाई माता ने अपने शासनकाल में काशी सहित देशभर में कई धार्मिक स्थलों और घाटों का निर्माण कराया था। मणिकर्णिका घाट भी उन्हीं प्राचीन घाटों में से एक है, जिसे आज विकास के नाम पर नष्ट किया जा रहा है।इंदौर वासियों ने स्पष्ट कहा कि पुराने रीति-रिवाजों और सनातन परंपरा के अनुसार इन घाटों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। यह ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे तोड़ना नहीं बल्कि उसी पुराने स्वरूप में संवारना चाहिए।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भावुक अपील
उनका कहना है कि यह केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। इंदौर के लोगों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा है कि मणिकर्णिका घाट में किसी भी तरह का हस्तक्षेप रोका जाए और इसे उसके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए। उनका कहना है कि विकास के नाम पर आस्था और इतिहास को कुचलने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस पूरे मामले में जिन लोगों ने बिना संवेदनशीलता के निर्णय लिया, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मणिकर्णिका घाट आज सिर्फ वाराणसी का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज की आस्था का प्रतीक है, और इसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
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