सुशील सलाम, कांकेर। जिले के ग्राम बारकोट के आदिवासी किसानों को एग्री स्टैक की तकनीकी गड़बड़ी की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। धान बेचने के अधिकार से वंचित हुए किसान 150 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय कांकेर पहुंचे और कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई।
पीड़ित किसानों ने बताया कि उपार्जन केंद्र संगम के अंतर्गत आने वाले उनके राजस्व ग्राम का नाम एग्री स्टैक पोर्टल पर पहले Berkot दर्ज था। इसी आधार पर ग्राम के 16 आदिवासी किसानों का पंजीयन किया गया, जिसे पटवारी और तहसील स्तर से सत्यापित भी कर दिया गया। बावजूद इसके बाद में पोर्टल में ग्राम का नाम Berkot से बदलकर Warkot कर दिया गया, जिससे किसानों के प्रोफाइल में “एग्री स्टैक पंजीयन से फार्मर आईडी अपात्र” दिखने लगा। इस तकनीकी बदलाव का सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।


किसानों ने बताया कि हमें धान बेचने के लिए टोकन जारी नहीं हो पा रहा। किसान उपार्जन की समय-सीमा में धान बेचने से वंचित हो रहे हैं। किसानों का सवाल है कि पोर्टल की गलती की सजा आदिवासी किसान क्यों भुगतें।
जल्द समस्याओं का समाधान किया जाएगा : कलेक्टर
इस मामले पर कलेक्टर निलेश कुमार क्षीरसागर ने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय में शासन को पत्र लिखा गया है और शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। कलेक्टर ने किसानों से तत्काल मुलाकात की और कहा कि जल्द ही किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
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