बारां। राजस्थान के शिक्षा विभाग से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। बारां जिले के राजपुरा गांव में तैनात एक शिक्षक दंपति ने पिछले 25-26 सालों से स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, लेकिन हर महीने सरकारी खजाने से मोटी सैलरी डकारते रहे। दरअसल, विष्णु गर्ग और उनकी पत्नी मंजू गर्ग ने अपनी जगह किराए के टीचर लगा रखे थे। अब जब पोल खुली, तो शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर विभाग ने इन पर 9.20 करोड़ रुपए की भारी-भरकम रिकवरी निकाल दी है।

कैसे चलता था मुन्नाभाई स्टाइल में स्कूल?
बता दें कि विष्णु गर्ग की भर्ती 1997-98 में और उनकी पत्नी मंजू की 1999 में हुई थी। सूत्रों ने बताया कि नियुक्ति के कुछ समय बाद ही दोनों ने स्कूल आना बंद कर दिया। खेल ऐसा रचा गया कि गांव के ही कुछ बेरोजगारों को डमी शिक्षक बनाकर कुछ हजार रुपए में स्कूल भेज दिया जाता और असली शिक्षक दंपति घर बैठकर पूरी सैलरी उठाते रहे। सूत्रों के अनुसार, इन्होंने अब तक करीब 2.20 करोड़ रुपए सिर्फ वेतन के रूप में लिए हैं।
मिड-डे मील में भी लगाई सेंध
गौरतलब है कि यह फर्जीवाड़ा सिर्फ हाजिरी तक सीमित नहीं था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस दंपति ने स्कूल के बजट और बच्चों के मिड-डे मील के पैसों में भी जमकर हेराफेरी की। विभाग ने 21 दिसंबर 2023 को जब पुलिस में शिकायत की, तब जाकर इस गहरी साजिश की परतें खुलीं। स्कूल में तैनात एक अन्य शिक्षिका मौसमी मीणा की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि आखिर इतने सालों तक यह राज दबा कैसे रहा?
ब्याज सहित होगी वसूली
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने साफ कर दिया है कि ऐसे धोखेबाजों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। विभाग ने जो 9.20 करोड़ रुपए की रिकवरी निकाली है, उसमें पिछले 25 सालों का मूल वेतन, उस राशि पर लगने वाला ब्याज और अन्य सरकारी फंड की हेराफेरी का जुर्माना शामिल है।
