धूमधाम से मनाया जाएगा माता कौशल्या दिवस, राम वनगमन मार्ग को धार्मिक पर्यटन के रूप में किया जाएगा विकसित- भूपेश बघेल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राम का ननिहाल है. मतलब माता कौशल्या की जन्मभूमि. ऐसे में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि हर साल माता कौशल्या दिवस मनाया जाएगा. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को इसकी घोषणा दूधाधारी मठ में रामकथा आयोजन के दौरान की. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम का ननिहाल है. यह माता कौशल्या की भूमि है. इसी वजह से छत्तीसगढ़ में भांजे को प्रणाम किया जाता है, क्योंकि हम उनमें भगवान राम की छवि देखते हैं.

सीएम बघेल ने कहा कि दूधाधारी मठ के महंत राजेश्री रामसुंदर दास जी द्वारा माता कौशल्या की जन्म तिथि के निर्धारण के लिए राष्ट्रीय स्तर का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें माता कौशल्या की जन्मतिथि बताने वाले को 11 लाख रूपए की राशि सम्मान स्वरूप प्रदान की जाएगी. माता कौशल्या की जन्मतिथि तय होने पर हम सब मिलकर माता कौशल्या का जन्म दिवस धूमधाम से मनाएंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम ने वनवास के समय छत्तीसगढ़ में काफी समय बिताया था. राम वनगमन मार्ग पर स्थित जिन स्थलों पर भगवान राम गए थे, उनका चिन्हांकन कर उन्हें धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा. भगवान राम का वनगमन मार्ग छत्तीसगढ़ के कोरिया से सुकमा-कोंटा तक विद्वानों ने बताया है. इन मार्ग पर महत्वपूर्ण स्थानों को चिन्हित कर उन्हें दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा.

शिवरीनारायण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण में शबरी ने जूठे बेर भगवान श्रीराम को खिलाए थे. शिवरीनारायण को विशेष रूप से धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा.  राजेश्री महंत राम सुंदरदास ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति और तीज-त्यौहारों को आगे बढ़ाने का बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर खारून नदी में सवेरे 5 बजे पवित्र कार्तिक स्नान कर भगवान हटकेश्वर महाराज की पूजा अर्चना की. गौ माता व्यवस्थित रूप से स्वच्छता के साथ रह सकें उनके लिए हर गांव में गौठान निर्माण की परिकल्पना मुख्यमंत्री ने की है. अनेक स्थानों पर गौठानों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है. उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दूधाधारी मठ पहुंचे थे और यहां दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया था.

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