अभय मिश्रा, मऊगंज। देहात के लोगों को इलाज की आस देने वाले सरकारी अस्पताल अगर खुद लापरवाही और भ्रष्टाचार का अड्डा बन जाएं, तो सोचिए आम जनता किस हाल में होगी। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीरें इस सच को उजागर करती हैं। जहां न डॉक्टर मौजूद हैं, न दवाइयां… यहां तक कि मरीज का इलाज करने के बजाय माली पट्टी और टांके लगाता नजर आता है और जब इस कड़वे सच को उजागर करने की कोशिश की गई, तो पत्रकार को ही धमकाने और फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का खेल खेला गया।

मऊगंज जिले का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नईगड़ी… नाम तो बड़ा है लेकिन हालात बद से बदतर। पूरा अस्पताल खाली पड़ा था न डॉक्टर, न नर्स, न दवा। गर्भवती महिलाएं तीन दिन से आयरन की गोली और ड्रिप के लिए अस्पताल के चक्कर काट रही थीं, लेकिन उन्हें इलाज तक नसीब नहीं हुआ। एक और मरीज तीन घंटे तक अस्पताल में बैठा रहा, लेकिन किसी डॉक्टर ने देखना तक ज़रूरी नहीं समझा।

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भगवान भरोसे और माली के सहारे अस्पताल, मीडियाकर्मी से अभद्र व्यवहार

हद तो तब हो गई, जब लोगों ने कहा कि अस्पताल का माली ही मरीजों की पट्टी और टांके लगाता है। यानी अस्पताल में इलाज भगवान भरोसे और माली के सहारे चल रहा है। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जब मीडिया ने इस लापरवाही की हकीकत दिखाने का प्रयास किया, तो अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक डॉ. पुष्पेंद्र मिश्रा बौखला गए। उन्होंने पहले कैमरे के सामने मीडियाकर्मी का हाथ पकड़कर अभद्र व्यवहार किया, अपशब्द कहे और खबर न चलाने की धमकी दी। जब दबाव में आने से इनकार कर दिया, तो डॉक्टर साहब ने उल्टा मीडियाकर्मी के खिलाफ थाने में जाकर फर्जी शिकायत दर्ज करा दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि रिपोर्टर धमकी दे रहा था।

न दवा न मरीजों के भोजन की व्यवस्था, बेडशीट भी नदारद

सच वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि डॉक्टर ही दुर्व्यवहार कर रहे थे और आरोप उल्टा पत्रकार पर मढ़ दिया गया। सूत्र बताते हैं कि इससे पहले भी अस्पताल प्रबंधन दो बार अन्य लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करा चुका है, ताकि अपनी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए दवा तक नहीं, मरीजों के लिए भोजन की कोई व्यवस्था नहीं, बिस्तरों पर बेडशीट तक नदारद, जबकि सरकारी फाइलों में लाखों रुपए खर्च दिखाए जाते हैं।

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ऐसा आखिर कब तक..?

स्पष्ट है कि जो भी आवाज उठाता है, अस्पताल प्रबंधन उसे ही मुकदमों में फंसा देता है। लेकिन सच को दबाना आसान नहीं। नईगड़ी अस्पताल की यह तस्वीर सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम में जमी गंदगी की कहानी कह रही है। सवाल ये है कि आखिर कब तक आम जनता इलाज के नाम पर ठगी जाएगी और सच दिखाने वाले पत्रकारों को डराने की कोशिश की जाएगी?

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