अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहां एक तरफ पारा गिरकर 5 से 7 डिग्री तक पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता भी चरम पर है। जिला कलेक्टर संजय जैन ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव और रैन बसेरों की मुकम्मल व्यवस्था की जाए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। मऊगंज मुख्यालय के बस स्टैंड और अस्पतालों में लोग ठिठुरने को मजबूर हैं।

मऊगंज में इस समय हाड़ कंपाने वाली ठंड का कहर जारी है। रात 9 बजते ही पारा 9 डिग्री के नीचे लुढ़क रहा है। कलेक्टर ने सुरक्षा के मद्देनजर कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी तो कर दी, लेकिन खुले आसमान के नीचे रात बिताने वालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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जिला अस्पताल का हाल भी बदहाल

बस स्टैंड और अस्पताल जैसे संवेदनशील इलाकों में नगर परिषद की ओर से अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यात्री कड़कड़ाती ठंड में खुले में बैठकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। वहीं जिला अस्पताल की बदहाली का आलम यह है कि मरीजों के परिजनों को घर से कंबल और चादर तक लाने पड़ रहे हैं।

कलेक्टर के आदेश को दरकिनार कर रही नगर परिषद

स्थानीय लोगों से जब बात की, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद कलेक्टर के आदेशों को ठेंगे पर रख रही है। न रैन बसेरों का पता है और न ही प्रमुख चौराहों पर अलाव जलाए गए हैं। अस्पताल में मरीजों के परिजनों का कहना है कि यहां न तो गर्मी की व्यवस्था है और न ही बुनियादी सुविधाएं। यहां तक कि लोग पन्नी लगाकर सड़क के किनारे रात गुजारने को मजबूर है।

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