अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज में खाकी ने न्याय का ही कत्ल कर दिया है। Lalluram.com और News24 की टीम की लगातार 22 दिनों तक की गई पड़ताल और सीसीटीएनएस पोर्टल से निकाले गए दस्तावेज के बाद उजागर की गई यह रिपोर्ट कानून के जानकारों को भी हैरान कर देने वाली है। मऊगंज में 1000 से ज्यादा मुकदमों में सिर्फ 6 चेहरों को गवाह बना दिया गया। CCTNS पोर्टल की एक क्लिक ने पुलिस की उस स्क्रिप्ट की पोल खोल दी है, जिसमें खाना बनाने वाले से लेकर गाड़ी चलाने वाले तक को प्रोफेशनल गवाह बना दिया गया। अब जब ये गवाह खुद कैमरे के सामने आए हैं, तो खाकी के झूठ का बम फट चुका है।

गवाहों का सिंडिकेट

इंदौर के उस चर्चित मामले को याद कीजिए जहां एक पॉकेट गवाहों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। लेकिन मऊगंज के लौर और नईगढ़ी थाने में तो उससे भी बड़ा खेल हो गया। जैसा कि Lalluram.com ने अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता से दिखाया, यहां थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के कार्यकाल में गवाहों का एक ऐसा सिंडिकेट चला, जिसने न्याय व्यवस्था को मजाक बना दिया। CCTNS पोर्टल के रिकॉर्ड बताते हैं कि महज 6 लोगों के कंधों पर 1000 से ज्यादा मुकदमों की गवाही टिकी हुई है।

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सब्जी विक्रेता-ड्राइवर से कराया दस्तखत

इस घोटाले के किरदारों से मिलिए। दिनेश कुशवाहा, जो कभी थाने में खाना बनाता था और सब्जी बेचकर परिवार पालता है। आज वो कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते बर्बाद हो चुका है। दिनेश का कहना है कि उसे पता ही नहीं कि कब उसे सैकड़ों केसों में गवाह बना दिया गया। वहीं राहुल विश्वकर्मा, जो थाना प्रभारी की गाड़ी चलाता था, उसे यह कहकर दस्तखत करा लिए गए कि मामला यहीं सेटल हो जाएगा, लेकिन आज वो कानून के जाल में फंस चुका है।

दिनेश कुशवाह (पिंक टी शर्ट) और विश्वकर्मा विश्वकर्मा (लाल टी शर्ट)

दबाव डालकर सिग्नेचर

पुलिस की स्क्रिप्ट की निर्दयता देखिए। कैमरों में कैद अरुण तिवारी की बेबसी देखिए, जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं और बिना सहारे के चल नहीं सकते। उन्हें उन वारदातों का गवाह बना दिया गया जहां पहुंचना उनके लिए मुमकिन ही नहीं था। पोर्टल के दस्तावेज कहते हैं कि ये गवाह मौके पर मौजूद थे, लेकिन सच्चाई ये है कि ये दस्तखत थाने की चार दीवारी के भीतर दबाव डालकर कराए गए थे।

500 से ज्यादा मामलों में सरकारी गवाह बना अमित

इस पूरे सिंडिकेट का सबसे खास चेहरा है अमित कुशवाहा। चर्चा है कि जहां साहब का ट्रांसफर होता, अमित भी वहीं पहुंच जाता। अमित न सिर्फ सरकारी गाड़ी चलाता था, बल्कि 500 से अधिक मामलों में सरकारी गवाह भी बना। ताज्जुब की बात ये है कि गवाही का ये पेशा उसे विरासत में मिला जो काम पहले उसके पिता करते थे, अब बेटा उसे बखूबी निभा रहा था।

थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर की फोटो

समाजसेवी ने की थी शिकायत

इस फर्जीवाड़े की गूंज जब समाजसेवी कुंज बिहारी तिवारी के जरिए DGP, आईजी और मुख्यमंत्री तक पहुंची, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी। Lalluram.com और News24 पर खबर प्रसारित होने के बाद, एसपी दिलीप सोनी ने तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर को लाइन अटैच कर दिया है। लेकिन सवाल वही है कि क्या सिर्फ लाइन अटैच करना काफी है ? उन हजारों मुकदमों का क्या होगा जिनमें इन फर्जी गवाहों के आधार पर किसी की जिंदगी बर्बाद कर दी गई ?

शिकायतकर्ता कुंजबिहारी तिवारी

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मऊगंज का यह मामला सिर्फ एक थाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम पर तमाचा है जो कागजों को भरने के लिए गरीब और मजबूर लोगों का इस्तेमाल करता है। थाना प्रभारी लाइन हाजिर हो चुके हैं, लेकिन जैसा कि Lalluram.com और News24 की पड़ताल इशारा कर रही है कि अगर मैनुअल जांच हुई तो कई और बड़े नाम इस गवाह घोटाले की जद में आएंगे। अब देखना यह है कि क्या उन बेगुनाहों को राहत मिलेगी जो इन फर्जी गवाहों की वजह से सलाखों के पीछे पहुंचे।

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