चैत्र नवरात्रि के दौरान मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इन पवित्र दिनों में यहां विशेष पूजा-अर्चना और अर्जी कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मान्यता है कि इस समय बालाजी महाराज, प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी आत्माओं से मुक्ति जल्दी मिलती है। लोग मानते हैं कि नवरात्रि में की गई प्रार्थना और अर्जी शीघ्र स्वीकार होती है।
बालाजी मंदिर के दर्शन किसी सामान्य मंदिर जैसे नहीं होते
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। जहां उन्हें बालाजी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर की मान्यता सैकड़ों साल पुरानी है। लोककथाओं और अनुभवों के अनुसार, यहां बुरी आत्माओं से पीड़ित लोग आते हैं और बालाजी की कृपा से उन्हें मुक्ति मिलती है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के दर्शन किसी सामान्य मंदिर जैसे नहीं होते। यहां अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जो मन को विचलित कर सकते हैं। कई लोग जोर-जोर से चिल्लाते हैं, रोते हैं, कांपते हैं और अलग-अलग भाषाओं में बोलते नजर आते हैं। जैसे-जैसे पूजा आगे बढ़ती है, इन लोगों की प्रतिक्रियाएं और तेज हो जाती हैं।
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यहां चढ़ाया प्रसाद घर नहीं ले जाया जाता है
मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां भूत-प्रेतों की पेशी होती है और फैसला स्वयं बालाजी महाराज सुनाते हैं। कई बार जिद्दी प्रेत से पीड़ित व्यक्ति को पकड़कर लाना पड़ता है, क्योंकि उसमें असाधारण ताकत आ जाती है और वह भागने की कोशिश करता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, यहां प्रसाद चढ़ाने की विशेष व्यवस्था है।
बालाजी को लड्डू, प्रेतराज सरकार को चावल और भैरव बाबा को उड़द दाल अर्पित की जाती है। प्रसाद को मंदिर परिसर में ही छोड़ने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे घर ले जाना नकारात्मक ऊर्जा को साथ ले जाने का प्रतीक माना जाता है।
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