दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद(Ashish Sood) ने कहा है कि आम आदमी पार्टी(AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal)तथा उनके नेताओं द्वारा किए गए कई दावों को दिल्ली की जनता ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया(Manish Sisodiya) को अपनी सीट बदलने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा. सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े दावे किए, लेकिन जनता ने इन दावों को अस्वीकार कर दिया.

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सरकार की सफलता विदेशी समाचार पत्रों जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट में खबरें प्रकाशित कराने से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों के माध्यम से मापी जाती है. इस संदर्भ में, केजरीवाल की उपलब्धियाँ निराशाजनक रही हैं. इसके परिणामस्वरूप, उनके पार्षद और नेता पार्टी छोड़ने लगे हैं, और केवल बयानबाज़ी करके अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे प्रयासों से उन्हें कोई ठोस परिणाम नहीं मिलने वाला है.

मंत्री ने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट के मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एक लाख 48 हजार बच्चों के लिए केवल 48 स्कूल क्यों हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केजरीवाल को बच्चों की शिक्षा की इतनी चिंता है, तो फिर वहां की लड़कियों को पढ़ाई के लिए सात-सात किलोमीटर पैदल क्यों चलना पड़ता है?

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विभाजनकारी राजनीति कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल

आशीष सूद ने कहा कि जब बॉर्डर पर धमाकों की आवाज सुनाई दी, तो केजरीवाल लुधियाना से दिल्ली भाग गए, जो विभाजनकारी राजनीति का संकेत है. इसके विपरीत, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सभी बच्चों के लिए काम कर रही हैं, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान. हम धर्म के आधार पर राजनीति नहीं करते, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए काम करने का प्रयास करते हैं. विभाजनकारी राजनीति को हम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकते.

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कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि तुर्की में उनका कार्यालय क्यों है और चीन के साथ उनके समझौतों का क्या महत्व है. इसके साथ ही, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि डोकलाम विवाद के दौरान राहुल गांधी ने चुपचाप चीन का दौरा क्यों किया. कांग्रेस हमेशा से वोट बैंक की राजनीति में संलग्न रही है, लेकिन वर्तमान में देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत नीतियों के साथ खड़ी है.