कुंदन कुमार, पटना। बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुए घटना की निंदा की है। घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संतोष कुमार सुमन ने कहा कि, जिस प्रकार न्यायिक अधिकारियों पर हमला किया गया और उन्हें घेरकर भय का वातावरण बनाया गया, वह अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि, इस प्रकार की घटनाओं में शामिल सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जानी चाहिए और यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर जनप्रतिनिधियों या मंत्रियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

NIA को जांच सौंपने का किया स्वागत

डॉ. संतोष सुमन ने कहा कि, चुनाव आयोग द्वारा इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपना एक स्वागत योग्य और आवश्यक कदम है। उन्हें विश्वास है कि NIA निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों तक पहुंचेगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और आम नागरिकों के साथ-साथ अब न्यायिक अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं, जो बेहद गंभीर विषय है।

‘ममता ने दिलाई इंदिरा गांधी के आपातकाल की याद’

संतोष सुमन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सत्ता खिसकता देख विचलित हैं और संवैधानिक व्यवस्थाओं को मानने के बजाय शासन में अराजकता का माहौल बनता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की वर्तमान परिस्थितियां देश के इतिहास के उस दौर की याद दिलाती हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में आपातकाल लगाया गया था, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं और अधिकारों पर व्यापक नियंत्रण देखने को मिला था।

‘दोषियों को मिलनी चाहिए कड़ी से कड़ी सजा’

डॉ. संतोष सुमन ने कहा कि, उसी प्रकार की एकछत्र शासन की मानसिकता यदि कहीं भी दिखती है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। ममता बनर्जी उसी राह पर हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें प्रभावित करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि, ममता सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना चाहिए तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल मालदा के कालियाचक इलाके में बीते बुधवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान तैनात 7 न्यायिक अधिकारियों को उग्र भीड़ ने घेरकर करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। अधिकारियों को देर रात पुलिस बल की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाएं भी सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम में बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस ने AIMIM नेता मोफक्करुल इस्लाम को “मुख्य साजिशकर्ता” बताते हुए गिरफ्तार किया।

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