आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन को लेकर शुरू हुए राजनीतिक विवाद अब केवल शब्दों का संघर्ष नहीं रह गया है। प्रदेश कांग्रेस इसे ग्रामीण रोज़गार और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल के रूप में पेश कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश कांग्रेस ने “मनरेगा बचाओ संग्राम” नामक जनसंपर्क अभियान शुरू किया है, जो धीरे-धीरे पंचायत स्तर तक पहुँच रहा है।

चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से कांग्रेस ने जनसंपर्क पदयात्रा निकाली। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में यह पदयात्रा टांडपाल से सिरीसगुड़ा तक लगभग आठ किलोमीटर लंबी रही। ग्रामीणों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने रोज़गार व मजदूरी से जुड़े अनुभव साझा किए।

पदयात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें बताया कि यूपीए सरकार के दौरान ग्रामीण मजदूरों को सौ दिन का कानूनी रोज़गार सुनिश्चित था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में औसतन मजदूरों को साल भर में केवल 38 दिन का काम मिल रहा है। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि योजना के कई मूल प्रावधान कमजोर किए गए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा नकारात्मक असर पड़ा है।

पदयात्रा में चित्रकोट के पूर्व विधायक राजमन बेंजान, जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन, नारायणपुर के पूर्व विधायक चंदन कश्यप सहित कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उन्होंने ग्रामीणों को मनरेगा योजना के महत्व और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए सूचनात्मक चर्चाएँ कीं।
ग्रामीणों ने इस दौरान मुख्य रूप से मनरेगा में काम के घटते दिन, मजदूरी का कम होना, योजना के बदलते प्रावधान और रोजगार की असमान उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए। कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थायी रूप से प्रभावित करने वाले निर्णयों के खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है।
प्रदेश भर की पंचायतों तक ले जाया जाएगा अभियान
कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान आने वाले महीनों में प्रदेश भर की पंचायतों तक ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को मनरेगा योजना में हुए बदलावों की जानकारी देना, उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें रोजगार के हक के लिए संगठित करना है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस पहल से न केवल ग्रामीण अपने अधिकारों को बेहतर समझेंगे, बल्कि योजना से मिलने वाले लाभ का सत्यापन और मांग भी कर सकेंगे।
दीपक बैज ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि यूपीए सरकार के समय ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन का रोज़गार कानूनी रूप से सुनिश्चित था, लेकिन आज औसतन केवल 38 दिन का काम मिलना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजना के मूल अधिकारों को कमजोर करने से न केवल मजदूर प्रभावित हुए हैं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।
इस अभियान में कांग्रेस का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को योजना की वास्तविक जानकारी देना और उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना है। प्रदेश कांग्रेस का यह मानना है कि ग्रामीण जब अपने अधिकारों को जानेंगे और समझेंगे तो योजना के लाभ का वास्तविक अनुभव भी कर सकेंगे और इसके लिए संगठित रूप से आवाज़ उठाने में सक्षम होंगे।
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