टुकेश्वर लोधी, आरंग। क्षेत्र के ग्राम भिलाई में स्थित ‘मोदी बायोटेक प्लांट’ स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण के लिए जी का जंजाल बन गया है। प्लांट प्रबंधन की कथित मनमानी और पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने के कारण न केवल कृषि भूमि बर्बाद हो रही है, बल्कि पशुओं की जान पर भी बन आई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन द्वारा जहरीला और दूषित पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे किसानों के खेतों और निस्तारी नालों में बहाया जा रहा है। इसका सीधा असर भिलाई, ओड़का और अकोलीखुर्द जैसे गांवों पर पड़ रहा है। दूषित पानी के कारण उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर हो रही है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।स्थिति इतनी भयावह है कि निस्तारी नाले का जहरीला पानी पीने से क्षेत्र के मवेशियों की मौत हो रही है। इसके साथ ही प्लांट द्वारा भू-जल का अंधाधुंध दोहन किए जाने से आसपास के गांवों का वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है। गर्मी से पहले ही गांवों में भीषण जल संकट गहराने लगा है।

प्रशासन की खानापूर्ति पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग मौन साधे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। हमारे मवेशी मर रहे हैं और खेत बर्बाद हो रहे हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम चक्काजाम और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि जांच टीमें केवल खानापूर्ति के लिए निरीक्षण करती है। प्लांट की अनियमितताओं पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।

कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

मोदी बायोटेक प्लांट शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है। अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे रहा है। क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्लांट की मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई और पर्यावरण की रक्षा के ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले समय में एक बड़ा जन आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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