मोदी सरकार लेकर आई नई शिक्षा नीति, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक आमूलचूल बदलाव का खींचा गया है खाका

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने तीन दशक के अंतराल के बाद नई शिक्षा नीति का एलान किया है. नरेंद्र मोदी कैबिनेट द्वारा बुधवार को मंजूरी दी गई नई शिक्षा नीति में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नया नाम शिक्षा मंत्रालय किया गया है, वहीं बहुभाषाई देश के लिहाज से अहम बदलाव करते हुए किए गए हैं. इस नीति में बहुभाषावाद और भाषा की शक्ति पर खास जोर दिया गया है.

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पहली शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसके बाद 1992 में इसमें बदलाव किया गया था. अब एक बार फिर नई नीति लागू की जा रही है. इस नई शिक्षा नीति में शिक्षा के अधिकार 2009 को भी बढ़ाया गया है. अब शिक्षा के अधिकार में 3 से 18 साल के बच्चों को शामिल किया जाएगा. इस नई नीति शिक्षा नीति का प्रस्ताव पिछले साल केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपा गया था, जिस पर अब कैबिनेट की मुहर लग गई है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दिए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि 34 साल से शिक्षा नीति में परिवर्तन नहीं हुआ था, इसलिए ये बेहद महत्वपूर्ण है. इसके बाद बाकायदा प्रेजेंटेशन देकर नई शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इस दौरान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद रहे.

नई शिक्षा नीति में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम पहले की तरह शिक्षा मंत्रालय करने का  प्रस्ताव दिया था, जिसे कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया है. वहीं नई शिक्षा नीति में स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं. नई शिक्षा नीति में घरेलू भाषा या स्थानीय भाषा पर जोर दिया गया है. नई नीति के तहत कम से कम क्लास 5 तक की पढ़ाई का माध्यम स्थानीय भाषा होगा. हायर एजुकेशन के लिए सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर). उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी GER पहुंचने का लक्ष्य है.

मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया गया है. आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरंग पढ़ने या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में 1 साल के बाद सर्टिफिकेट, 2 साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी. स्टूडेंट्स के हित में यह एक बड़ा फैसला है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि जो रिसर्च में जाना चाहते हैं उनके लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा. जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकते हैं. इसके लिए एमफिल की जरूरत नहीं होगी.

नई शिक्षा नीति के संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को ज्ञान आधारित महाशक्ति बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं. मेरा मानना है कि नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से हम भारत को गुणवत्ता परक, नवाचार युक्त, प्रौद्योगिकी युक्त और भारत केंद्रित शिक्षा दे पाने में सफल होंगे. नई शिक्षा नीति को गुणवत्ता, पहुंच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता के आधार पर एक समूह प्रक्रिया के अंतर्गत बनाया गया है, जहां विद्यार्थियों के कौशल विकास पर ध्यान दिया गया है, वहीं पाठ्यक्रम को लचीला बनाया गया है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सके.

नई शिक्षा नीति के मुख्य बिंदु

  • नई शिक्षा नीति के लिए 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गई.
  • सरकार ने शिक्षा नीति को लेकर 2 समितियां – टीएसआर सुब्रमण्यम समिति और डॉ. के कस्तूरी रंगन समिति बनाई गई थी.
  • ग्रेडेड अटॉनमी के तहत कॉलेजों को एडमिनिस्ट्रेटिव, अकैडमिक और फाइनैंशल अटॉनमी दी जाएगी.
  • क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे.
  • वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे.
  • एक नैशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम (NETF) शुरू किया जाएगा.

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