सोहराब आलम/पूर्वी चंपारण। मोतिहारी में जहरीली शराब से हुई त्रासदी के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर सक्रिय हो गया है। इस घटना ने पूरे तंत्र को झकझोर कर रख दिया है जिसके परिणामस्वरूप अब प्रभावित क्षेत्रों में जीवन बचाने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है।

​मेडिकल कैंप और डोर-टू-डोर सर्वे

​प्रशासन ने बालगंगा, शंकरसरैया और परसौना जैसे सबसे अधिक प्रभावित गांवों को केंद्र में रखते हुए तत्काल मेडिकल कैंप स्थापित किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित बस्तियों में डेरा डाले हुए हैं। डॉक्टरों द्वारा संदिग्धों की गहन जांच की जा रही है और गंभीर लक्षण दिखने पर उन्हें तुरंत बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जा रहा है। इसके साथ ही, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं की टोलियां घर-घर सर्वे कर रही हैं, ताकि कोई भी पीड़ित इलाज से वंचित न रह जाए।

​डर भगाने के लिए माइकिंग और फ्लैग मार्च

​इस त्रासदी के बीच एक बड़ी चुनौती सामाजिक डर और पुलिसिया कार्रवाई का भय है। कई लोग शराब सेवन की बात स्वीकार करने से कतरा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें गांवों में निरंतर माइकिंग कर रही हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट घोषणा की है कि इलाज कराने आने वाले व्यक्तियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। परसौना और आसपास के क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाल कर ग्रामीणों में विश्वास बहाल करने की कोशिश की गई है।

​अवैध नेटवर्क पर प्रहार और अपील

​प्रशासन ने न केवल राहत कार्य तेज किया है बल्कि अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। जनता से अपील की गई है कि वे अवैध निर्माण या बिक्री की सूचना पुलिस को दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अब त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान कर जनहानि के आंकड़ों को रोकना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को समाप्त करना है।