सोहराब आलम/ मोतिहारी। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद तस्करों ने अपना रास्ता बदलते हुए सूखे नशे को हथियार बनाना शुरू किया है। भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर गांजा, चरस और अफीम जैसे घातक पदार्थों की खेप मोतिहारी के रास्ते गांव-गांव तक पहुंच रही थी, जिससे युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है।
SP का क्लीन मोतिहारी अभियान
युवाओं को नशे के दलदल से निकालने के लिए मोतिहारी के पुलिस कप्तान (SP) स्वर्ण प्रभात ने एक विशेष अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के तहत जिले भर में पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो दिन-रात छापेमारी कर रही हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष पुलिस ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए हैं।
बॉर्डर पर SSB की चौकसी
खुली सीमा से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए पुलिस अब SSB (सशस्त्र सीमा बल) के साथ मिलकर सीमावर्ती इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चला रही है। SP स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट किया कि पुलिस केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए ‘स्पीडी ट्रायल’ का सहारा ले रही है। इससे तस्करों के बीच खौफ का माहौल बना है।
गांव-गांव तक पुलिस की नजर
मोतिहारी पुलिस के अनुसार, तस्करों ने अब शहरी इलाकों के बजाय ग्रामीण इलाकों को निशाना बनाना शुरू किया है। पुलिस की टीमें अब जमीनी खुफिया तंत्र को मजबूत कर तस्करी के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने में लगी हैं। एसपी ने संकल्प दोहराया है कि जब तक जिला पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता, यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
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