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राकेश चतुर्वेदी,भोपाल। मध्यप्रदेश की आर्टिस्ट दुर्गाबाई व्याम को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. पद्मश्री दुर्गाबाई का यह सफर बहुत कठिन रहा है. वो पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन जर्मनी में दुर्गाबाई के स्टूडेंट्स हैं. दुर्गाबाई ने कहा कि आज खुशी के फूल झड़े हैं. सोचा नहीं था कि पद्मश्री मिलेगा. जर्मनी के स्टूडेंट्स ऑनलाइन डिगना चित्रकारी सीखते हैं. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई के छात्र भी दुर्गाबाई के स्टूडेंट्स है.

दुर्गाबाई व्याम ने मिट्टी की कला को कहानियों में उकेरा है. दुर्गाबाई ने आजी-दादी से डिगना कला सीखी है. डॉ आंबेडकर का जीवन  चित्रों में उकेर दिया. देवी-देवताओं से लेकर जीव-जंतुओं की कहानी बना डाली. मिट्टी से कैनवास पर डिगना कला उकेर दिया. पति सुभाष सिंह व्याम ने कहानियां सुनाई. दुर्गाबाई ने चित्रों में उकेर दीं. बेटा मानसिंह व्याम भी डिगना कला में माहिर है. बेटी रोशनी व्याम और रजनी श्याम ने भी डिगना कला सीखी है. दामाद मयंक के साथ बहुओं ने भी कला सीखी है.

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बता दें कि दुर्गाबाई मूल रूप से डिंडोरी जिले के सुनपुरी की रहने वाली हैं. 1976 में दुर्गाबाई अपने पति सुभाष के साथ भोपाल चली गईं, जहां उन्हें कला से अधिक लगाव हो गया, यहां उन्होंने अपने साले जंगगढ़ सिंह श्याम से कला की बारीकियां सीखीं. इस दौरान आर्थिक दिक्कतें भी सामने आईं. कम पैसों में घर चलाना मुश्किल हुआ.

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