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मनीषा त्रिपाठी, भोपाल। हम जितना चलेंगे, जितनी सीढ़ियां चलेंगे, हमारे जॉइंट्स उतने मजबूत होंगे. यह धारणा लोगों में आम है. लेकिन रोड, घर, ऑफिस हर जगह मौजूद हार्ड सरफेस और हील और सख्त सोल वाले फुटवियर के कारण घुटनों का कार्टिलेज जल्द खराब हो रहा है. राजधानी में इन दोनों घुटनों के दर्द को लेकर काफी युवा ओपीडी में पहुंच रहे हैं.
घुटने दर्द की समस्या लेकर पहुंचे रहे 35 साल या उससे ज्यादा उम्र के हर तीसरे व्यक्ति में आर्थराइटिस की बीमारी डिटेक्ट हो रही है. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में घुटनों की समस्या ज्यादा होती है, जो कि मेनोपॉज या प्रेगनेंसी के बाद शरीर में आए बदलाव का एक मुख्य कारण होता है.
कुछ दवाओं और फिजियोथैरेपी की मदद इसे ठीक किया जा सकता है. समय रहते ध्यान न दिया तो इसमें ऑपरेशन तक करना पड़ सकता है. घुटनों का ओस्टियो आर्थराइटिस एक तरह का गठिया है. जो कभी बुजुर्गों की बीमारी समझा जाता था. लेकिन अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खान-पान की वजह से अब युवाओं में भी या समस्या बढ़ रही है.
एक स्टडी के अनुसार, 2050 तक दुनिया में कमर और जोड़ों के दर्द की समस्या से जूझने वालों की संख्या 84 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी. 2017 के बनिस्बत 2020 में कमर दर्द से परेशान मरीजों की संख्या में करीब 12 करोड़ का इजाफा हो गया है. साल 2020 में दुनिया में कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे मरीजों की संख्या 61.9 करोड़ पहुंच गई है, जो दुनिया की संख्या जनसंख्या का करीब 8% है.
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