शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार को अपने खर्च में बढ़ोत्तरी करनी होगी। दरअसल, एमपी में बजट का सिर्फ 67 फीसदी खर्च हुआ है। जिसके बाद अगले 15 दिन में उन्हें 1.10 लाख करोड़ खर्च करने होंगे। 15 दिन में  खर्च नहीं किए तो रकम सरेंडर करनी होगी। 

वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म होने में मात्र 15 दिन बचे हैं। इस साल मध्यप्रदेश का बजट 3.30 लाख करोड़ का था जिसमें से 2.21 लाख करोड़ खर्च हुआ जो बजट का 66.89 फीसदी है। दूसरे विभाग बमुश्किल 50 से 70 फीसदी बजट खर्च सके हैं। 

किसमें कितना हुआ खर्च ?

लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, सीएम किसान सम्मान निधि में खर्च हुई बजट की 100 फीसदी राशि

कृषि विभाग में भावांतर और किसान सम्मान निधि का पैसा बांटकर बजट से ज्यादा 198 फीसदी खर्च हुआ

अर्बन – 65.34

हेल्थ – 69.93

PWD – 71.26

पंचायत – 50.91

ग्रामीण विकास – 43.82

हॉर्टिकल्चर – 57.81

अनुसूचित जाति -57.11 फीसदी

महिला बाल विकास – 91.45 

स्कूल 87.11

सामाजिक कल्याण – 84.11

खाद्य – 82.58

अजजा – 81.81

ऊर्जा 80.61 – फीसदी 

इन विभागों में सबसे ज्यादा बजट का इस्तेमाल हुआ। है

बजट के खर्च न होने पर सियासत

बजट खर्च नहीं होने पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के अंदर लूट मची हुई है। उन्होंने कहा कि 25 फीसदी बजट खर्च नहीं हुआ तो यानी बेमतलब प्रोविजन किये गए। 15 दिन में सरकार 1 लाख करोड रुपए से ज्यादा खर्च करेगी तो अधिकारी मनमानी करेंगे। मध्यप्रदेश में फर्जी आंकड़े बाजी होती है। हर हफ्ते कर्ज लिया जा रहा है, आखिर क्यों? जब आपके पास सरप्लस बजट है तो कर्ज लेने की जगह बचे बजट का इस्तेमाल करें। कर्ज सरकार लेती है और ब्याज जनता चुकाती है। 

भाजपा का पलटवार- विभाग को जरूरत के हिसाब से दी राशि 

कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि बीजेपी सरकार में मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है। हर विभाग को सरकार की तरफ से जरूरत के हिसाब से राशि दी गई है। बचे हुए दिन में बची हुई राशि खर्च की जाएगी। बीजेपी सरकार में धन की कमी नहीं हो सकती। बीजेपी के राज्य में एमपी विकास प्रदेश बन गया है। कांग्रेस सरकार सिर्फ पैसा नहीं होने का रोना रोती थी।

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