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इमरान खान,खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा के इतिहास में 21 सितंबर का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा इस दिन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अद्वैत वेदांत के जनक आदिगुरु की 108 फिट ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान देश भर से आए साधु संतों की उपस्थिति में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फुट ऊंची प्रतिमा जिसे “स्टैचू आफ वननेस” के रूप में 21 सितंबर को मुख्यमंत्री के हाथों इसका अनावरण होगा। प्रदेश सरकार ओंकारेश्वर को आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की परियोजना पर काम जारी है। पूरे प्रोजेक्ट को एकात्म धाम के रूप मे जाना जाएगा। 2000 करोड़ के लागत से बने इस प्रोजेक्ट में ओंकार पर्वत पर समस्त निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का निर्माण कार्य अपने आखिरी पायदान पर है। जिसके लोकार्पण के बाद इसे 5 किमी दूर से भी देखा जा सकेगा।
1300 संत और महंत
पहले ये कार्यक्रम 18 सितंबर को होने वाला था. लेकिन बारिश और बाढ़ की वजह से इसे टालकर 21 सितंबर कर दिया गया। अब अनावरण के लिए प्रतिमा तैयार है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मौजूदगी में अनावरण होगा जिसमें जूना अखाड़ा के महा मंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद सहित देश के 1300 संत और महंत मौजूद रहेंगे। गुरुवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचेंगे। वैदिक यज्ञ अनुष्ठान के साथ आहुति होगी तो वहीं शैव परंपरा के नृत्यों की प्रस्तुतियां होंगी।
पूरे ओंकार पर्वत को दुल्हन की तरह सजाया गया है। यहां पिछले एक सप्ताह से भाष्य परायण का पाठ प्रकांड विद्वानों के द्वारा किया जा रहा हैं। इस एकात्म धाम की सबसे बड़ी बात यह हैं कि आदिगुरु शंकराचार्य जी की प्रतिमा के जिस स्वरूप को यहां स्थापित किया जा रहा है वह उनके बाल्यकाल की अवस्था का है। दरअसल इसी अवस्था में केरल से पैदल चलकर वे ओंकारेश्वर पहुंचे थे जहां उन्होंनेअपने गुरु आचार्य गोविंद भगवतपाद से गुरु दीक्षा ली थी।
ओंकारेश्वर में 36 हेक्टेयर के क्षेत्र में तैयार हो रहा यह स्थान जिसका नाम ‘अद्वैत लोक’ रखा जाएगा। इस जगह को अद्वैत वेदांत के एकात्मता का वैश्विक केंद्र बनाया जा रहा है। इसमें आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा, अद्वैत लोक, संग्रालहय और आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान का निर्माण कराया जाएगा। इसके माध्यम से अद्वैत वेदांत और भारतीय दर्शन का विश्व में प्रचार प्रसार किया जा सकेगा। बहरहाल ओंकारेश्वर आने वाले दिनों में पर्यटन के रूप में एक नया आयाम बनाकर उभरेगा जहां न सिर्फ धर्म बल्कि दर्शन के लिए भी नए द्वार खोले जाएंगे।
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