राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ में शामिल होंगे। यह कांफ्रेंस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडिया एआई मिशन के सहयोग से आयोजित की जा रही है, जिसका थीम है ‘एआई-एनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड इंडिया’। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआई-सक्षम शासन और आर्थिक परिवर्तन के लिए मध्य प्रदेश का रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करेंगे।  

इसके अलावा, मध्यप्रदेश इनोवेशन एक्सपो का शुभारंभ होगा, जिसमें इंडिया एआई पेवेलियन, मध्य प्रदेश पेवेलियन, स्टार्टअप शोकेस, हैकाथॉन एरिना और स्टार्टअप प्रतियोगिता शामिल होंगी।सबसे महत्वपूर्ण घोषणा होगी मध्य प्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 की लॉन्चिंग। यह नीति हाल ही में मंत्री-परिषद द्वारा मंजूर की गई है, जो उपग्रह निर्माण, भू-स्थानिक विश्लेषण और डाउनस्ट्रीम एप्लिकेशनों में नवाचार को बढ़ावा देगी।

MP में सरकारी कर्मियों के लिए आ रही कैशलेस हेल्थ स्कीम

मध्य प्रदेश सरकार कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लाने की अंतिम तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह योजना मुख्यमंत्री कर्मचारी एवं पेंशनर्स व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना (या मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना) के नाम से जल्द ही शुरू होने वाली है।यह योजना आयुष्मान भारत मॉडल पर आधारित होगी, जिसमें प्रदेश के अंदर और बाहर के चिह्नित निजी एवं सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं, व्हाट्सएप नंबर पर भी फीडबैक मांगे गए हैं।

योजना की मुख्य विशेषताएं 

  • सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख रुपये तक का कवर
  • गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज
  • हर साल 10 हजार रुपये तक की ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और दवाइयों का कवर भी शामिल
  • योजना में सभी राज्य सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके परिवार के सदस्य पात्र होंगे
  • इसमें स्थायी, अस्थायी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा कार्यकर्ता, कोटवार आदि शामिल हो सकते हैं
  • कुल लाभार्थी संख्या लगभग 15 लाख से अधिक अनुमानित (नियमित कर्मचारी, संविदा, पेंशनर्स और परिवार)


फिलहाल इस खाके पर अंतिम मंथन चल रहा है। कर्मचारी संगठनों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर सरकार ने सकारात्मक कदम उठाया है। वर्तमान व्यवस्था में इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है और बाद में रीइंबर्समेंट मिलता है, जो समय लेता है और कई बार अपर्याप्त होता है। नई कैशलेस स्कीम से यह परेशानी खत्म हो जाएगी।

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