हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों को लेकर अब मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस के पूर्व महासचिव राकेश यादव ने इसे सीधा राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कहा है कि सच्चाई को जानबूझकर दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।
कई असामान्य मौतों के बावजूद पोस्टमार्टम नहीं कराए
राकेश यादव का आरोप है कि पानी में केवल पोटेशियम क्लोराइड ही नहीं, बल्कि पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄) की भी अत्यधिक मात्रा मिलाई गई। यह एक ऐसा रसायन है, जो सीमित मात्रा में कीटाणुनाशक के रूप में उपयोग होता है, लेकिन अधिक मात्रा में जानलेवा ज़हर में बदल जाता है। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में जो हालात बने, वे सामान्य नहीं हैं। बड़ी संख्या में लोगों का ICU और वेंटिलेटर तक पहुंचना, लगातार मौतें और इसके बावजूद स्पष्ट सरकारी जवाब न मिलना इस ओर इशारा करता है कि किसी स्तर पर सच्चाई छिपाई जा रही है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कई असामान्य मौतों के बावजूद पोस्टमार्टम नहीं कराए गए।
आपराधिक और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कृत्य
राकेश यादव ने सवाल उठाया कि- पोस्टमार्टम न कराने का फैसला किसके दबाव में लिया गया? क्या यह साक्ष्य मिटाने और जिम्मेदार लोगों को बचाने की राजनीतिक साज़िश का हिस्सा है? उनका कहना है कि यदि पानी में पोटेशियम परमैंगनेट अधिक मात्रा में डाला गया, तो यह महज गलती नहीं, बल्कि आपराधिक और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कृत्य है। ऐसा पानी इंसानों के लिए ज़हरीला बन जाता है। इससे मुँह, गले और पेट में जलन, उल्टी-दस्त, आंतरिक रक्तस्राव, किडनी-लीवर फेल होना और दम घुटने जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, जो अंततः मौत तक ले जाती हैं। पशुओं पर भी इसका असर घातक बताया जा रहा है। गाय-भैंस जैसे पशु अगर ऐसा पानी पी लें, तो उनके मुँह में घाव, पेट में सूजन, झाग निकलना और कुछ ही घंटों में मौत तक की स्थिति बन सकती है।
न तो स्वतंत्र रासायनिक जांच न ही मौतों की निष्पक्ष पड़ताल
राकेश यादव ने कहा कि यदि यह साबित होता है कि जानबूझकर या लापरवाही से KMnO₄ डाला गया, तो यह सरकारी तंत्र के संरक्षण में हुआ जहरकांड माना जाएगा। ऐसे मामलों में IPC की धारा 284 (ज़हरीले पदार्थ से खतरा) और 304A (लापरवाही से मौत) के तहत कार्रवाई बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते न तो स्वतंत्र रासायनिक जांच कराई जा रही है और न ही मौतों की निष्पक्ष पड़ताल हो रही है। यही कारण है कि वे राज्य स्तरीय जांच पर भरोसा नहीं करते और सीधे CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

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