दीपक सोहले, बुरहानपुर. एमपी का बुरहानपुर जिला महाराष्ट्र से सटा हुआ है. ऐसे में वहां कई रीति-रिवाज महाराष्ट्र की तर्ज पर निभाया जाता है. लेकिन आज हम आपको ऐसी रस्म के बारे बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आपको थोड़ा अजीब लगेगा. क्योंकि बुरहानपुर में शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन एक दूसरे पर थूकते हैं. इस रस्म को शुभ माना जाता है.

वैसे तो बुरहानपुर के देशमुख मराठा के समाज के लोग इस परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन अब इसे अधिकांश समाज के लोग निभाते है. यह 500 साल परंपरा है. शादी के बाद दूल्हा-दूल्हन को एक साथ खड़ा किया जाता है. फिर उनकी हल्दी उतारी जाती है. जिसे हल्दी उतरने का रस्म कहा जाता है. दूल्हा-दुल्हन को नहलाने से पहले दोनों को खोपरा दिया जाता है.

नहलाने से पहले निभाई जाती है रस्म

दोनों इस खोपरे को मुंह में चबाकर पानी मुंह में लेकर एक दूसरे पर कुल्ली (थूकते) हैं. यह प्रक्रिया तीन से चार बार अपनाई जाती है. इसके उन्हें नहलाया जाता है. इस दौरान दूल्हा-दुल्हन पर परिवार का हर एक व्यक्ति अपने आशीर्वाद के तौर पर एक-एक लोटा पानी डालता है और उनकी हल्दी उतारी जाती है. ऐसी मान्यता है कि जब तक दूल्हा-दुल्हन की हल्दी नहीं उतरेगी तब तक दोनों कोई कार्य नहीं कर सकते और न ही कहीं बाहर अकेले घूम सकते हैं.

ये है मान्यता

मान्यता के अनुसार, अगर दूल्हा-दुल्हन हल्दी लगे हुए अकेले घूमते हैं या कही बाहर जाते हैं तो इन पर दुष्परिणाम पड़ सकता है. इसके लिए यह रस्म निभाई जाती है. यह भी मान्यता है कि जब दूल्हा-दुल्हन एक दूसरे पर थूकते हैं तो वे अपने पिछले जीवन के पापों और दोषों को दूर करते हैं और एक नए जीवन की शुरुआत करते हैं. यह परंपरा दूल्हा-दुल्हन के बीच के प्रेम और एकता को मजबूत बनाने में मदद करती है.

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