
शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कल बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से ‘जल गंगा संवर्धन’ (Jal Ganga Sanvardhan) अभियान का शुभारंभ करेंगे। गुड़ी पड़वा के अवसर पर शुरू होने वाला यह अभियान 30 जून तक चलेगा। क्षिप्रा तट से प्रदेश व्यापी जल संरक्षण अभियान की शुरुआत होगी।
वरुण देव की पूजा कर अभियान की शुरुआत करेंगे CM डॉ. मोहन यादव
प्रदेश में बारिश के पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से यह महा अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वरुण देव की पूजन और जलाभिषेक कर विधिवत शुभारंभ करेंगे। 30 जून तक 90 दिन से अधिक समय तक चलने वाले इस अभियान के हर दिन सीएम एक छोटी-बड़ी जल संरचना का लोकार्पण करेंगे। इस दौरान भूजल स्तर के सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे।
90 दिनों तक होंगे ये महत्वपूर्ण कार्य
- “जल गंगा संवर्धन अभियान” में पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, वन्य जीवों के लिए वन क्षेत्र और प्राणी उद्यानों में जल संरचनाओं के पुनर्विकास के कार्य किए जायेंगे।
- 90 दिनों में प्रदेश की 90 लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होगा।
- नदियों में जलीय जीवों को पुनर्स्थापित किया जाएगा।
- लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 50 हजार नए खेत-तालाब बनाए जाएंगे।
- ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के तालाबों, जल स्रोतों एवं देवालयों में कार्य किए जाएंगे।
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 1000 नए तालाबों का निर्माण करेगा।
- प्रदेश की 50 से अधिक नदियों के वाटरशेड क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य होंगे।
- नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए गेबियन संरचना, ट्रेंच, पौध-रोपण, चेकडैम और तालाब निर्माण पर जोर दिया जायेगा।
- नर्मदा परिक्रमा पथ का चिन्हांकन कर जल संरक्षण एवं पौध-रोपण की कार्य योजना तैयार होगी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में पानी चौपाल आयोजित होंगी। स्थानीय लोगों को जल संरचनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
- प्रत्येक गांव से महिला-पुरुष का चयन कर प्रदेश में लगभग 1 लाख जलदूत तैयार किए जाएंगे।
- सीवेज का गंदा पानी जल स्त्रोतों में न मिले, इसके लिए सोक पिट निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, तालाबों की पिचिंग, बैराज मरम्मत कार्य होंगे।
- नगरीय विकास एवं आवास विभाग जल संरचनाओं के संवर्धन का कार्य करेगा।
- नहरों को मार्क कर विलेज-मैप पर “शासकीय नहर” के रूप में अंकित किया जाएगा।
- बांध तथा नहरों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। करीब 40 हजार किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली का सफाई कार्य होगा।
- फ्लश बार की मरम्मत और स्लूस-वैल की सफाई कार्य भी होंगे।
- सदानीरा फिल्म समारोह, जल सम्मेलन, प्रदेश की जल परंपराओं पर आख्यान, चित्र प्रदर्शनी समेत विभिन्न आयोजन किये जायेंगे।
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