सुधीर दंडोतिया, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने लोकायुक्त संस्था को भंग करने की मांग की है। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने आरोप लगाते हुए कहा कि सौरभ शर्मा और उसके साथियों को जानबूझकर लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है। कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सौरभ शर्मा की ( 60 दिन में चालान ना फ़ाइल करने के कारण ) बेल हो जान , पब्लिक ट्रस्ट के साथ बड़ा धोखा है। यदि ( स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट – लोक आयुक्त) को इतनी सहानुभूति थी, तो अरेस्ट की भी क्या ज़रूरत थी।
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बता दें कि प्रदेश के बहुचर्चित धन कुबेर सौरभ शर्मा को जमानत मिल गई है। परिवहन विभाग के आरक्षक रहते हुए सौरभ शर्मा अपनी अवैध कमाई की वजह से सुर्खियों में आया था। उसके पास से करोड़ों की नगदी, सोने चांदी का जखीरा मिला था। इस संबंध में लोकायुक्त पुलिस के पास गवाह और पर्याप्त सबूत भी हैं। बावजूद इसके, लोकायुक्त कोर्ट से उसे जमानत मिलने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगा है।
60 दिन के अंदर पेश करना था चालान
दरअसल, लोकायुक्त पुलिस 60 दिन बाद भी इस मामले में चालान पेश नहीं कर पाई। इसका फायदा आरोपियों को मिला है। कोर्ट ने भी लोकायुक्त पुलिस की इस लापरवाही पर हैरानी जताई है। जानकारों के मुताबिक लोकायुक्त पुलिस को 60 दिन के अंदर कोर्ट में चालान पेश करना होता है। इसके बाद मामला ट्रायल कोर्ट में चला जाता है। जहां मामले की गंभीरता के आधार पर ट्रॉयल कोर्ट तय करती है कि जमानत दी जाए या नहीं। इस मामले में 60 दिन बाद भी लोकायुक्त पुलिस कोर्ट में चालान दाखिल नहीं कर पाई थी। इस आधार पर आरोपियों ने लोकायुक्त पुलिस को टारगेट करते हुए जमानत अर्जी दाखिल कर दी। नियम भी है कि ऐसी स्थिति में यदि रासुका या मकोका का मामला ना हो तो जमानत दी जा सकती है। इसी नियम के तहत कोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी।
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