हेमंत शर्मा, इंदौर। लव जिहाद फंडिंग मामले में फरार चल रहे कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत ने आखिरकार इंदौर जिला कोर्ट में सरेंडर कर दिया। एनकाउंटर का डर लगने पर कादरी वकील का भेष बनाकर अदालत पहुंचा और 11वें अपर सत्र न्यायाधीश मिनी गुप्ता की कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। उनके फरारी के पीछे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के नामों की भी चर्चा है।

कई प्रदेश सहित नेपाल तक पुलिस को चकमा देता रहा

अनवर कादरी पर अब तक 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस की लगातार तलाश और खुफिया तंत्र की नाकामी के बावजूद वह करीब डेढ़ महीने तक फरारी काटता रहा। इस दौरान वह हैदराबाद, सिलीगुड़ी, भुसावल, बुरहानपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश होते हुए नेपाल तक पुलिस को चकमा देता रहा। जानकारी के अनुसार उसकी पत्नी भी हैदराबाद से नेपाल में उससे मिली और दोनों करीब एक महीने तक वहीं छुपे रहे। नेपाल में ही एनकाउंटर का डर लगने पर अनवर ने अपना हुलिया बदला और फिर भारत लौटकर इंदौर की अदालत में सरेंडर कर दिया।

मामला क्या है

14 जुलाई को बाणगंगा इलाके की दो युवतियों ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज करवाई थी। दोनों ने आरोप लगाया था कि अल्ताफ और साहिल नामक आरोपियों को अनवर कादरी ने तीन लाख रुपए की फंडिंग की थी। इसके बाद ही अनवर फरार हो गया था। उस पर 40 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया और संपत्ति कुर्की का नोटिस भी जारी हुआ। फरारी के दौरान उसकी बेटी आयशा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था, जबकि पूरा परिवार अचानक लापता हो गया था।

पुलिस की अगली जांच

पुलिस अब अनवर से फरारी के दौरान के ठिकानों, मददगारों और आर्थिक स्रोतों के बारे में पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार शक है कि फिशरीज फर्म और विदेश से आए पैसों के जरिए लव जिहाद की फंडिंग की जा रही थी। पुलिस ने कादरी के बैंक खातों की जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही फरारी में पत्नी की भूमिका पर भी पुलिस की नजर है और उसे भी आरोपी बनाया जा सकता है।

राजनीतिक कनेक्शन की पड़ताल

सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान यदि राजनीतिक भूमिका सामने आती है, और अनवर कादरी की फरारी के पीछे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे का हाथ होता है तो उनसे भी कड़ाई से पूछताछ की जाएगी। क्योंकि अनवर कादरी कांग्रेस से ही पार्षद रहा है और दोनों नेताओं का करीबी भी माना जाता है।

अगर मदद की तो वह भी दोषी पाया जाएगा

ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि अगर अनवर कादरी कोई राजनीतिक सपोर्ट के चलते फरार चल रहा था और उसे दौरान किसी राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता ने अगर मदद की तो वह भी इसमें उतना ही दोषी पाया जाएगा जितना की अनवर कादरी है। एडिशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा का कहना है सारे तथ्यों पर पूछताछ की जा रही है किसी की भी भूमिका संदिग्ध होती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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