शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश को देश भर में ‘टाइगर स्टेट’ के नाम से जाना जाता है। सबसे अधिक टाइगर होने की वजह से यहां के बाघों की डिमांड अन्य राज्यों में होती है। यही वजह है कि प्रदेश के कुछ बाघों को 1 महीने बाद राजस्थान, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की शान बढ़ाने के लिए भेजा जाएगा। 

NTCA से मिली अंतिम मंजूरी

दरअसल, बांधवगढ़, कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ के एक-एक जोड़े सीजी, उड़ीसा और राजस्थान भेजे जाने हैं। इन रिजर्व में टाइगर क्षमता से अधिक हैं, इसलिए इन जगहों का चुनाव किया गया है। इसे लेकर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की अंतिम मंजूरी मिल गई है। बाघों को ले जाने का खर्च दूसरे राज्य को ही वहन करना होगा।

उड़ीसा से बाघ सुरक्षा लिखित शपथ पत्र लेगी एमपी सरकार

मध्य प्रदेश सरकार उड़ीसा में बाघ भेजने पर राजी तो हो गया है, लेकिन उसके लिए वहां की सरकार को बाघ सुरक्षा का लिखित पत्र मध्य प्रदेश सरकार को देना होगा। दरअसल, साल 2018 में  एमपी के बांधवगढ़ से बाघिन सुंदरी और कान्हा से बैग महावीर को उड़ीसा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व भेजा गया था। वहां बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए टाइगर की शिफ्टिंग की गई थी। लेकिन उस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था और मौका पाकर बाघ ‘महावीर’ को मार डाला था। 

बाघिन को भी की थी मारने की कोशिश

ग्रामीणों ने बाघिन सुंदरी को भी कई बार मारने की कोशिश की थी। जिसके बाद उसे नंदन कानन नेशनल पार्क भेज दिया गया है। तब मध्य प्रदेश में बाघिन की वापसी की पहल हुई थी। काफी जद्दोजहद के बाद बाघिन को 2021 में मध्य प्रदेश लाकर कान्हा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था।

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