कुंदन कुमार, पटना। केंद्रीय बजट और बिहार में छात्रा से जुड़े मामले को लेकर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने बजट को आम आदमी विरोधी बताते हुए कहा कि यह बजट सिर्फ पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के लिए बनाया गया है, जबकि बिहार, युवा, किसान और मध्यम वर्ग पूरी तरह नजरअंदाज कर दिए गए हैं।

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि, पिछले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन वह खर्च ही नहीं हो पाए। उन्होंने दावा किया कि इस बार के बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य का नामोनिशान नहीं है।

पप्पू यादव ने कहा कि बिहार के लिए बजट का कोई मतलब नहीं रह गया है, जहां चुनाव होता है, वहीं सरकार योजनाओं की घोषणा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुनकरों, किसानों, स्टार्टअप्स, छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और युवाओं के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। इनकम टैक्स को लेकर भी सरकार पुराने स्लैब पर ही लौट आई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया, लेकिन वह पैसा आम आदमी पर खर्च नहीं हुआ। उनका कहना था कि सरकार विकास से ज्यादा विज्ञापनों पर पैसा खर्च कर रही है।

वहीं, शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा से जुड़े मामले पर भी पप्पू यादव ने गंभीर सवाल खड़े किए। वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने मांग की कि 5 तारीख दोपहर 3 बजे से 6 तारीख दोपहर 3 बजे तक का पूरा सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब सीसीटीवी फुटेज सीबीआई को सौंप दिया गया था, तो फिर वीडियो बाजार में कैसे आया। पप्पू यादव ने कहा कि पीड़िता का चेहरा ढकने के नियमों का उल्लंघन किया गया है और जिन पुलिसकर्मियों ने यह वीडियो लीक किया, उन्हें जेल में होना चाहिए।

पप्पू यादव ने सवाल उठाया कि नीतू की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही, मनीष रंजन को रिमांड पर क्यों नहीं लिया गया और डॉक्टर सतीश की भूमिका पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने बिहार पुलिस की CID और SIT पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि किसी बड़े नेता और पैसे वाले को बचाने के लिए एक बेटी और उसके परिवार को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि PMCH के डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बाद की वैज्ञानिक रिपोर्ट को झुठलाने की कोशिश की जा रही है। पप्पू यादव ने इसे इतिहास का सबसे जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि पीड़िता के माता-पिता पर आत्महत्या मानने का दबाव बनाया गया।

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