MSME Government Support Scheme: केंद्र सरकार ने भारत के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य मंत्रालय ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के तहत दो नए कंपोनेंट लॉन्च किए हैं, जिससे देश के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को सीधा फायदा मिलेगा.

इन पहलों का मकसद MSME को सस्ता एक्सपोर्ट क्रेडिट देना, उनकी लागत कम करना और ग्लोबल मार्केट में उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है. यह पहल ऐसे समय में अहम मानी जा रही है, जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार की चुनौतियों और अमेरिकी टैरिफ के दबाव का असर छोटे कारोबारों पर पड़ा है.

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छह साल के लिए ब्याज सब्सिडी

एक्सपोर्ट प्रमोशन पहल के तहत प्री और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम लागू की गई है. यह स्कीम 2025 से 2031 तक लागू रहेगी और इस पर सरकार करीब 5,181 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

शुरुआती चरण में पात्र MSME को मौजूदा बाजार दर से 2.75 प्रतिशत तक कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा. यह ब्याज दर फ्लोटिंग होगी और रेपो रेट से जुड़ी रहेगी, ताकि आर्थिक हालात के अनुसार इसमें बदलाव हो सके.

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नए बाजारों में एक्सपोर्ट को बढ़ावा

सरकार का फोकस सिर्फ सस्ता क्रेडिट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक्सपोर्ट के दायरे को बढ़ाने पर भी है. जो MSME अपने उत्पाद नए और उभरते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजेंगे, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा.

इस संबंध में विस्तृत नोटिफिकेशन बाद में जारी किया जाएगा. इसका मकसद भारतीय एक्सपोर्ट में विविधता लाना है, ताकि कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भरता कम हो और ज्यादा बाजारों तक पहुंच बनाई जा सके.

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कम कोलैटरल पर आसान बैंक लोन

दूसरी अहम पहल एक्सपोर्ट क्रेडिट के लिए कोलैटरल सपोर्ट से जुड़ी है. इस स्कीम के तहत MSME कम कोलैटरल या थर्ड पार्टी गारंटी पर बैंक लोन ले सकेंगे. यह स्कीम CGTMSE यानी क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज के जरिए लागू की जाएगी.

आमतौर पर कोलैटरल की कमी के कारण MSME को 9.5 से 12.5 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता है, लेकिन नई योजनाओं से उनकी फाइनेंसिंग लागत घटेगी. इससे उत्पादन लागत कम होगी और भारतीय उत्पाद ग्लोबल बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे.

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