गुरबत में जिंदगी गुजारने वाली जनता को मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखाने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने एक और शिगूफा छोड़ा हो। रिटायरमेंट के बाद विदेश में बसने का प्लान कर चुके मुनीर ने दावा किया कि इस्लाम के नाम पर बने पाकिस्तान का असली मकसद पूरा होने वाला है। उन्होंने ये बात रविवार को लाहौर में पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल से कही। आसिम मुनीर यहां पूर्व पीएम शहबाज शरीफ के नाती जुनैद सफदर के वलीमा (रिसेप्शन) में शामिल होने आए थे। इसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नवाज शरीफ, मरियम नवाज, कई सीनियर नेता, मंत्री और सैन्य अधिकारी मौजूद थे।
इस बातचीत में आसिम मुनीर ने कहा कि अल्लाह ने पाकिस्तान को एक ऐतिहासिक मौका दिया है, ताकि वो अपने बनने का मकसद हासिल कर सके और देश तेजी से उसी तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था और आज उसे इस्लामिक देशों के बीच एक खास दर्जा हासिल है। अब इसकी अहमियत और ज्यादा बढ़ेगी।
मुनीर बोले- पाकिस्तान की हालात में बहुत सुधार हुआ
आसिम मुनीर ने दावा किया कि दुनिया में पाकिस्तान की स्थिति और उसकी आर्थिक हालत में काफी सुधार हुआ है। जब उनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि अगर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई सराहना मिल रही है, तो वह भी अल्लाह की मेहरबानी है। उन्होंने कहा कि असल में यह पाकिस्तान को मिली पहचान है, किसी एक इंसान को नहीं। उनके इस बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से हुई मुलाकातों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को पाकिस्तान में दुर्लभ खनिजों और कच्चे तेल के रिसोर्स का भरोसा भी दिलाया, जिनकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।
आसिम मुनीर लगातार कट्टरपंथी बयान देते रहे हैं
आसिम मुनीर ने अप्रैल 2025 में इस्लामाबाद में हुए ओवरसीज पाकिस्तानियों के सम्मेलन में कहा था कि टू नेशन थ्योरी ही पाकिस्तान की बुनियाद है। उन्होंने कहा था कि मुसलमानों और हिंदुओं के बीच बुनियादी फर्क है और दोनों एक नहीं, बल्कि अलग-अलग राष्ट्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की नींव कलमा पर टिकी है और इस सोच को आगे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। आसिम मुनीर अपने भाषणों में इस्लामिक विचारधारा, टू नेशन थ्योरी और भारत के खिलाफ बयानबाजी पर जोर देते रहे हैं।
पुराने सेना प्रमुखों से बिल्कुल अलग माने जाते हैं मुनीर
आसिम मुनीर अपने पहले के सेना प्रमुखों से काफी अलग माने जाते हैं। पहले के ज्यादातर सेना प्रमुख पश्चिमी सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षित पेशेवर सैनिक थे, जो धर्म और राजनीति से दूरी बनाए रखते थे। इसके उलट आसिम मुनीर हाफिज-ए-कुरान हैं और मजहब उनकी पब्लिक इमेज का अहम हिस्सा है। वह पाकिस्तान के ऐसे पहले अधिकारी हैं, जिन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस और ISI दोनों की लीडरशिप की है। उनकी लीडरशिप में पाकिस्तानी सेना खुद को सिर्फ देश की रक्षा करने वाली ताकत नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने वाली ताकत के रूप में भी पेश कर रही है।
इसके लिए पुराने इस्लामिक और अरबी प्रतीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय विद्रोहियों को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ जैसे नाम दिए जा रहे हैं और उन्हें गुमराह ताकतें और भारत का समर्थक बताया जा रहा है।
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